कलश स्थापना आज:अमावस्या के साथ पितृपक्ष विदा, देवी-देवताओं का होगा आगमन

चाईबासा2 महीने पहले
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महालया देवी पक्ष की शुरुआत और पितृ पक्ष के अंत का प्रतीक होता है। इस दिन सभी लोग अपने पितरों को विदाई देते हैं और मां दुर्गा को आने की प्रार्थना करते हैं। इससे एक पौराणिक मान्यता जुड़ी है। कहा जाता है कि इस दिन मां दुर्गा कैलाश पर्वत से धरती पर आने की अपनी यात्रा शुरू करती हैं। उनके लिए भक्त भजन व प्रार्थना करते हैं। जिससे वह धरती पर आकर उन्हें असुरों से बचाएं। महालया एक संस्कृत शब्द है, जिसमें महा का अर्थ होता है महान और लया का अर्थ होता है निवास। ये उत्सव मां दुर्गा के असुरों पर विजय के प्रतीक के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन सभी लोग अपने पितरों को विदा करते हैं। पुरुष सफेद धोती पहन कर गंगा में स्नान के बाद अपने पितरों का तर्पण कर आशीर्वाद लेते हैं।

सदर बाजार स्थित काली मंदिर में रविवार को अमावस्या के दिन मां काली की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ ही अन्न भोग का भी आयोजन किया गया था। पूजा के मौके पर भारी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ थी। मंदिर के पुजारी अनूप मल्लिक द्वारा पूजा संपन्न कराई गई। आयोजक सह ट्रस्ट कमेटी के सदस्य अशोक कुमार राय ने बताया कि प्रत्येक वर्ष महालया यानि अमावस्या के दिन इस मंदिर में मां की विशेष पूजा-अर्चना व अन्न भोग की व्यवस्था की जाती है।

मां काली के पास जो भी भक्त सच्चे मन से मन्नतें मांगते हैं, उसकी मनोकामना मां जरूर पूरी करती हैं। इस मंदिर में सिर्फ चाईबासा ही नहीं अन्य जगहों से भी भक्त पहुंचते हैं। यह मंदिर लगभग 200 वर्ष पूर्व स्थापित किया गया है। हाल ही में इस पुराने मंदिर को तोड़कर नवनिर्मित भव्य मंदिर बनाया गया है। इसे मंदिर में जो भी भक्त आता है, वह खाली हाथ नहीं जाता। कार्यक्रम को सफल बनाने में काली मंदिर ट्रस्ट कमेटी के सदस्य अशोक कुमार राय, त्रिशानु राय, अभिषेक राय, अनूप कुमार राय, अनिर्वाण राय, प्रवीण राय, सुभांशु राय आदि उपस्थित थे।

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