धर्म आस्था:माताओं ने रखा जितिया व्रत, सुनी पौराणिक कथा

इटखोरी6 दिन पहले
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इटखोरी प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में रविवार को माताओं ने 24 घंटे का निर्जला उपवास रखकर जीवित्पुत्रिका व्रत की। जीवित्पुत्रिका व्रत धारण कर माताएं अपने अपने संतान की उज्जवल भविष्य और लंबी उम्र की कामना की। इससे पूर्व वे टोली बनाकर गीत गाते हुए विभिन्न नदी और तालाब के तट पर पहुंची। यहां से गिला मिट्टी और पाकर का डाल अपने-अपने घर लाई। घरों में पाकर का डाल स्थापित कर गीला मीट्टी को स्वयं चिल और सियारिन की प्रतिमा बनाई। फिर इन प्रतिमाओं को पाकर डाल के नीचे स्थापित कर जीवित्पुत्रिका व्रत कर पुरोहितों से पौराणिक कथाएं सुनी।

चील व सियारिन और जीमूत वाहन से संबंधित कथाएं सुनकर अंत में मंगल आरती की। फिर रात्रि जागरण कर भजन और गीत गाए। सुबह होते हीं माताएं चील, सियारिन और पाकर की डाल को नदी और तालाबों में विसर्जन कर अपने अपने घर लौट गए। घर आकर गौशाला में पारण कर माताएं व्रत तोड़ दी। इनके घरों में बने चावल, दाल और कई प्रकार की लजीज सब्जियां अपने अपने सगे संबंधियों को खिलाए।

इसी के साथ जीवित्पुत्रिका व्रत संपन्न हो गया। इधर जिउतिया के मौके पर सोमवार को प्रखंड के शहरजाम, धुना, कटुवा, प्रेमनगर, परोका, करनी और हलमत्ता इत्यादि स्थानों पर झूमर का आयोजन होता है। झूमर देखने प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। यहां मांदर की थाप पर नाचते झूमते महिला और पुरुष उपस्थित लोगों का खूब मनोरंजन करते हैं।

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