प्रयासों के बाद , जिले में कुपोषण के शिकार हैं:जिले में 39 % बच्चे ठिगने, 23% का वजन निर्धारित मापदंड से कम

चतरा2 महीने पहलेलेखक: नौशाद आलम और विपिन सिंह
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चतरा का कुपोषण उपचार केंद्र में मां-बच्चा। - Dainik Bhaskar
चतरा का कुपोषण उपचार केंद्र में मां-बच्चा।

कई प्रयासों के बाद भी चतरा जिले में नौनिहाल तंदुरुस्त नहीं हैं। जिले में आज भी जीरो से पांच वर्ष आयुवर्ग के ज्यादातर बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। नेशनल हेल्थ फैमिली के एक सर्वे के अनुसार कुपोषण के कारण ज्यादातर बच्चे अंडर वेट और ठिगने (नाटे) हैं। इनका वजन निर्धारित मानक से कम है। आयु के अनुसार इनकी लंबाई भी कम है।

सबसे बुरी स्थिति गांवों की है। शहरी इलाके की स्थिति कुछ बेहतर है। आंकड़े के अनुसार जिले के करीब 39 प्रतिशत बच्चे आयु के अनुसार कम लंबाई के यानी ठिगने हैं। 23 प्रतिशत बच्चों का वजन लंबाई के अनुसार कम है।

जबकि दस प्रतिशत बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण के शिकार हैं। यह स्थिति तब है, जब बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग से आईसीडीएस के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को रेडी टू ईट के रूप में विशेष आहार दिया जाता है। जिले में कुल 1124 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। जिले के स्कूलों में चलने वाले मिड डे मील का भी यही उद्देश्य है। जिले में लगभग 1570 विद्यालयों में बच्चों को मिड डे मील दिया जा रहा है।

चतरा सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अजहर बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण को लेकर जागरुकता का अभाव है। जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराने से उनमें होने वाली 20 फीसदी बीमारियों को रोका जा सकता है। लेकिन इलाके में इसे लेकर महिलाएं जागरूक नहीं हैं। अभी भी 30 से 35 प्रतिशत नवजात को ही जन्म के पहले घंटे में मां का दूध (कोलेस्ट्रॉम अर्थात खिरसा) मिल पाता है। इस दूध में रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है।

बहुत सारे नवजात से इससे वंचित रह जाते हैं। छह माह तक के 25 से 30 प्रतिशत बच्चों को एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग भी नहीं मिल पाता है। ऐसे बच्चों को मां के दूध के साथ ऊपरी आहार (सामान्य दूध या डिब्बा बंद दूध) मिलता है। ऐसी स्थिति में बच्चों की सेहत में सुधार के लिए जागरूकता जरूरी है।

बच्चों के इलाज के लिए चल रहे 4 कुपोषण उपचार केंद्र
चतरा में फिलहाल चार कुपोषण उपचार केंद्र चल रहे हैं। हालांकि अपेक्षा अनुसार केंद्रों में इलाज के लिए बच्चे नहीं पहुंच पा रहे हैं। एक आंकड़ा के अनुसार जिले में ये केंद्र चतरा, हंटरगंज, सिमरिया व टंडवा में चल रहे हैं। वर्तमान में चतरा वह हंटरगंज कुपोषण उपचार केंद्र में चार-चार, सिमरिया में 11 व टंडवा में 12 कुपोषित बच्चों को इलाज चल रहा है। अगर जनवरी से अबतक की स्थिति पर एक नजर डाली जाए तो चतरा में सिर्फ 128, हंटरगंज में 48, सिमरिया में 69 और टंडवा में 79 कुपोषित बच्चों का इलाज हुआ है।

कुपोषण की बड़ी वजह जागरूकता की कमी

नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे के अनुसार स्थिति में राज्य के साथ चतरा जिले में भी सुधार हुआ है। हेल्थ फैमिली सर्वे 4 के अनुसार जिले में 51.3 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार थे। लेकिन सर्वे-5 के अनुसार अब कुपोषित बच्चों की संख्या 40 प्रतिशत से नीचे आ गई है। हालांकि जमीन स्तर पर अब भी स्थिति में बहुत बदलाव नहीं दिखता है। जानकारों के अनुसार बच्चों में कुपोषण की एक बहुत बड़ी वजह जागरूकता है।

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