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दुमका उपचुनाव:बाबूलाल ने कहा- भाई को विधायक बनाने के लिए हेमंत ने छोड़ी सीट, लगता है कि अब शिबू सोरेन के पोता-पोती भी यहां विधायक बनने की लाइन में लगे हुए हैं

दुमकाएक महीने पहले
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पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने गुरूवार को सदर प्रखंड में ताबड़तोड़ 13 चुनावी सभा को संबोधित किया।
  • पूर्व मुख्यमंत्री ने जनता से की अपील, कहा- 3 नवंबर को मतदान के दिन 5 मिनट चिंतन करने के बाद ही अपने मताधिकार का प्रयोग करें

दुमका से चुनाव जीतने के बाद हेमंत सोरेन ने अपने भाई बसंत सोरेन को विधायक बनाने के लिए सीट छोड़ी थी। सोरेन परिवार संथाल परगना की सभी सात सुरक्षित सीटों पर कब्जा करना चाहता है। अभी परिवार के कई सदस्य लाइन में खड़े हैं। अभी भी समय है, लोग सजग हो जाएं। तीन नवंबर को मतदान के दिन पांच मिनट चिंतन करने के बाद ही अपने मताधिकार का प्रयोग करें। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने गुरूवार को सदर प्रखंड में ताबड़तोड़ 13 चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने भाजपा प्रत्याशी लुईस मरांडी के लिए बलिया डंगाल, नकटी, दिग्धी बाहाटोला, चांदोपानी, ऊपर मुर्गाथली, हेट मुर्गाथली, गोलपुर, सागबेहड़ी, घासीपुर, शहरघाटी, बड़तल्ली व राजबांध में सभा को संबोधित किया। बलियाडंगाल में कहा कि हेमंत सोरेन ने दुमका सीट किसी और के लिए नहीं बल्कि भाई को स्थापित करना के लिए सीट छोड़ी थी। शिबू सोरेन पहले एमएलए बने और फिर सांसद। इसके बाद बड़े बेटे विधायक बने। उनके स्वर्गवास के बाद पत्नी सीता सोरेन जामा से विधायक बनी। हेमंत सोरेन विधायक बने। उनके सीट छोड़ने के बाद बसंत सोरेन आए हैं।

सोरेन परिवार संथाल परगना में परिवार को स्थापित करने में लगे हैं। संथाल परगना में सात आरक्षित सीट है। हेमंत व बसंत की पत्नी है। इसके अलावा शिबू सोरेन के पोता-पोती भी लाइन में लगे हुए हैं। इस बार सभी को मिलकर परिवार को स्थापित करने की परंपरा को तोड़ना है। ऐसा नहीं किया तो सभी सात सुरक्षित सीट पर परिवार का कब्जा होगा। इसे हर हाल में रोकना है। यह परिवार विकास की नहीं पैसों की राजनीति करता है। भाजपा ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जो राज्य की दिशा व दशा बदल सकती है।

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