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बकरीद:कुर्बानी तभी कबूल होगी जब इंसान अपना घमंड छोड़ेगा

खाेरीमहुआ14 दिन पहले
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  • लोगों को जमीयत ओलमा ए हिन्द ने लोगों को दी बधाई, क्षेत्र के लोगों को संबोधित करते हुए मौलाना इलियास ने कहा-

जमीयत ओलमा ए हिन्द के जिला उपाध्यक्ष सह इमारत ए शरिया बिहार उड़ीसा झारखंड के सदस्य साथ मे संचालक मदरसा जामिया उस्मान बिन अफ्फान ख़ोरीमहुआ के मौलाना इलियास मुजाहिरी ने कहा कि कुर्बानी देना उस वक्त तक कामयाब नहीं हो सकता जब तक इंसान अपने गरुर और घमंड को हमेशा हमेशा के लिए खत्म ना कर दे। ईद उल अजहा का पर्व भाईचारगी की पहचान है। जानवर की बलि से पहले हमें अपने मन में बसे शैतान को निकाल फेंकना होगा, तब जाकर हमारी दी हुई कुर्बानी काबुल की जाएगी।

बकरा ईद बकरे की कुर्बानी देने का नाम नहीं हैं बल्कि सुन्नत इब्राहिम पर अमल करने का और मनाने का नाम है। इस कुर्बानी से हर बेटे को सीख लेना चाहिए की हजरत इब्राहीम ने अपने लख्त जिगर बेटे को अपना सपना बताया और बेटे ने बाप की आवाज पर लब्बेक कहकर बाप के हुक्म का कहना मान अपनी कुर्बानी देने पर राजी हो गए और अपने अल्लाह को भी राजी कर लिया। पता चलता है कि मां-बाप की रजा में भी अल्लाह की रजा पाई जाती है।

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