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जमीन की तलाश:सिदो-कान्हो पार्क नहीं खुला, अब नए पार्क के लिए निगम तलाश रहा जमीन

गिरिडीह5 दिन पहले
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सिदो कान्हो पार्क का मुख्य गेट जहां झाड़ियां उग गई है। - Dainik Bhaskar
सिदो कान्हो पार्क का मुख्य गेट जहां झाड़ियां उग गई है।
  • 93 लाख खर्च के बाद भी सिदो-कान्हो पार्क काे आज तक चालू नहीं कर पाया निगम
  • 2010 में हुआ था शिलान्यास

गिरिडीह शहर में बने सिदो-कान्हो पार्क लगभग तैयार हो चुका है। इस पार्क को बनाने में लगभग 93 लाख 500 रुपए खर्च किए गए हैं। बावजूद पार्क को अब तक खोला गया नहीं गया। वहीं अब नगर निगम शहर में अन्य स्थानों पर नए पार्क बनाने के लिए जमीन की तलाश कर रहा है।

गिरिडीह शहर में अब कई छोटे-छोटे पार्क हैं और कई और पार्क बनाने की योजना नगर निगम बना रहा है। पार्क के लिए जमीन ढूंढी जा रही है। उपयुक्त जमीन मिलते ही डीपीआर तैयार होगा और फिर निर्माण होगा। लेकिन शहर में जो पहला पार्क बना था सिदो-कान्हो पार्क वह बेकार पड़ा है।

ऐसे में इस सिदो-कान्हो पार्क को बनाने में जो राशि खर्च की गई है वह बेकार हो गया। यह पार्क शुरू होने से पहले टूट-फूट गया और अब वहां सिर्फ झाड़ियां ही झाड़ियां हैं। जहां दिनभर जुआड़ियों और नशेड़ियों का अड्‌डा रहता है। हालांकि शहर में अब पार्क में घूमने-फिरने का कल्चर बढ़ा है। अब यहां शहीद सीता-राम पार्क, बरमसिया चिल्ड्रेन पार्क और शस्त्रीनगर पार्क और आइएमएस रोड समेत चार पार्क हैं। जिसमें से बरमसिया चिल्ड्रेन पार्क और शास्त्रीनगर पार्क ही बेहतर स्थिति में है।

आइएमएस पार्क काफी दिनो से बंद है। बताया जाता है कि 2010 में तत्कालीन सांसद रवींद्र कुमार पांडेय ने बस स्टैंड और झिंझरी मोहल्ला के बीच जिस सिदो-कान्हो पार्क की आधारशीला रखी थी वह आज तक पूरा नहीं हो पाया। जबकि इसके निर्माण के नाम पर करीब 93 लाख रुपए की निकासी हो गई है।

नौ वर्ष पहले शहर में सिदो-कान्हो के नाम पर पहला पार्क बनना शुरू हुआ था। अब ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि जो पार्क बनकर तैयार है उसे खोलने की बजाय अब जिले में नए पार्क के लिए डीपीआर बनाना और जमीन की तलाश करना कहां तक सही है।

जानकारी के मुताबिक पार्क का निर्माण मेसर्स संसार ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड करा रहा था। इस पार्क के निर्माण के लिए पहले फेज में 49 लाख 5 हजार 272 और दूसरे फेज में 44 लाख एक हजार 300 रुपए दिए गए थे। जिसके साथ एकरारनामा बना था कि पार्क निर्माण कार्य पूर्ण होने पर पांच वर्षों के लिए इसका मेनटेनेंस भी संसार ग्रीनटेक ही करेगी। लेकिन यह काम कभी पूरा हुआ ही नहीं। इसका मेंटेनेस कितना हुआ यह तो पार्क देख कर ही समझा जा सकता है। यह भी जानकारी है कि इस पार्क की कार्य एजेंसी विशेष प्रमंडल है।

जिसमें नगर पर्षद से भी जिला प्रशासन ने काफी राशि ली थी। लेकिन कुछ कारणों से निर्माण कार्य काफी दिनों तक बंद हुआ और दोबारा शुरू हुआ भी तो पूरा नहीं हुआ। पानी की कमीपूर्ति के लिए दो डीप बोरिंग कराई गई, लेकिन बोरिंग फेल हो गया। पीएचईडी से भी यहां पानी की मांग की गई थी, लेकिन मिला नहीं। नतीजतन पार्क कभी पूरा ही नहीं हो पाया।

झाड़ियों से घिर चुका है पार्क, टूटने लगी है दीवारें

बस स्टैंड के पास इस पार्क में आज सिवाय झाड़ियों के कुछ भी नहीं है। पार्क का दरवाजा बंद रहता है। कुछ जगह दीवारें टूट गइ है जहां से जानवर चरने पहुंच जाते हैं। इसके अलावा शाम मंे शराब व सिगरेट पीने वालों को कुछ जगहों पर देखा जा सकता है। पार्क का निर्माण बीआरजीएफ से हुआ था। जिसका शिलान्यास तत्कालीन सांसद रवींद्र पांडेय ने किया था। शिलान्यास कार्यक्रम में गिरिडीह विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी, तत्कालीन नप अध्यक्ष पूनम प्रकाश और उपाध्यक्ष विभाकर पांडेय भी शामिल थे।

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