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मानसून के साइड इफेक्ट:उसरी नदी के जर्जर पुल के करीब पहुंचा जलस्तर, बहाव से हो सकता है बड़ा हादसा, पहले से 3 खंभे हैं क्षतिग्रस्त

गिरिडीहएक महीने पहले
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लगातार बारिश से उफनाई उसरी नदी का जलस्तर पुल के करीब पहुंचा। - Dainik Bhaskar
लगातार बारिश से उफनाई उसरी नदी का जलस्तर पुल के करीब पहुंचा।
  • पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश से नदी किनारे बसे लोगों में डर, शुक्रवार को जिले में 59 मिमी. हुई बारिश
  • शहरी जलापूर्ति की पाइप लाइन भी इसी पुल से होकर गुजरती है

पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का साइड दिखना शुरू हो गया है। एक तरफ उसरी नदी उफान पर है। गुरुवार को जहां 66.67 मिमी. बारिश हुई, वहीं शुक्रवार को 59 मिमी बारिश के साथ ही पिछले कई सालों का रिकॉर्ड टूट गया। पानी की तेज बहाव के बीच उसरी नदी की पुरानी व जर्जर पुल पर खतरा भी मंडराने लगा है।

पानी भी पुल से थाड़ा ही नीचे रहा हे, यदि बारिश की गति यही रही तो जल्द ही पानी उपरी सतह से गुजरेगा, जो पुल की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी होगी। वैसे भी पुल का दो पीलर पिछले तीन सालों से क्षतिग्रस्त हो गया है। लिहाजा, पीडब्लूडी की ओर सुरक्षा के मद्देनजर पुल के दोनों छोर पर स्थायी बैरिकेटिंग लगा दी गई है। बावजूद ऑटो, टोटो, बाईक, साइकल व पैदल राहगीरों की आवाजाही जारी है। जो लोगों के लिए जोखिम भरा सफर हो सकता है। क्योंकि पुल का निचला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है, जो पानी के तेज बहाव में धराशायी हो सकता है। विदित हो कि ऐसी ही बारिश में 24 साल पहले इस पुल के उपरी हिस्से से पानी का तेज बहाव हो रहा था, जिसमें यात्रियों से भरी बस नदी में समा गई थी और 40 यात्रियों की मौत हो गई थी। जिसमें सोनबाद के एजेंट महेश्वर सिंह भी शामिल थे। जिनका शव चार दिन बाद बराकर के समीप मिली थी। पिछले साल भी पानी पुल पर से गुजर रहा था।

इन सब कारणों से उसरी नदी स्थित पुरानी पुल पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है, जो कभी भी धराशायी हो सकती है। खंडौली से होने वाली जलापूर्ति की पाईपलाईन भी फिलहाल इसी पुल के उपर से गुजरी है। यदि पुल धराशायी हुआ तो सबसे पहले गिरिडीह शहरी क्षेत्र के लोगों को खंडौली से मिलने वाली जलापूर्ति तत्काल बंद हो जाएगी। जिसका गिरिडीह जिला प्रशासन के पास कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि इस पुराने पुल के पास ही नया पुल बनना प्रस्तावित है।

इससे पहले जलापूर्ति पाईपलाईन के लिए अलग पुल बनाया जा रहा है, जो फिलहाल अधूरा पड़ा है। जबकि पाईपलाईन के लिए बन रहे पुल का निर्माण कार्य एक साल पूर्व ही पूर्ण हो जाना था। लेकिन संवेदक व विभाग की लापरवाही से यह ठंडे बस्ते में चला गया है। इधर उसरी नदी को उफनता देख आसपास मोहल्ले के लोग भी भयभीत हैं। खासकर वैसे लोगों को ज्यादा डर सताने लगा है, जिसने नदी के किनारे घर बना रखा है। लोगों को डर है कि कहीं तेज धार में मिट्‌टी का कटाव के साथ घर भी न समा जाए।

तेज आवाज के साथ सिहोडीह में धराशायी हो गया पुराना पेड़

इधर, बारिश के बीच सिहोडीह में एक मोटा पेड़ जड़ से धराशायी हो गया। जिसमें लोग बाल-बाल बच गए। संयोग था कि आम का पुराना पेड़ उल्टे दिशा में गिरा। जिस तरफ घर मकान बना हुआ है उस तरफ गिरता तो चार-पांच घरों को अपनी चपेट में ले लेता। गुरुवार की रात मूसलाधार बारिश के बीच जब लोग घरों में गहरी नींद में सो रहे थे, तभी तेज आवाज के साथ पेड़ धराशायी हुआ। जिससे लोगों की नींद खुली तो देखा कि बगल स्थित पुराना आम का पेड़ धराशायी हो गया है। इसके अलावा कुछ दूरी पर एक पेड़ बिजली ट्रांसफार्मर पर जा गिरा। जिससे बिजली ट्रांसफार्मर, तार व पोल सारा कुछ धराशायी हो गया। इससे आसपास के इलाके में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।

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