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जिला प्रशासन राेकने नहीं उठा रहा कदम:शराब बिक्री महिलाओं के रोजगार का साधन बना, घर-घर की है यही कहानी

जामताड़ा2 महीने पहले
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एक ओर राज्य सरकार महिलाओं के शराब बिक्री काे राेकने के लिए कदम उठाने की बात करती है वहीं पबिया सहित अन्य क्षेत्राें में खुलेआम महिलाएं शराब बेचते दिख जा रही हैं। दरअसल कुछ गांवाें में आदिवासी परिवारों में शराब बनाने से लेकर बेचने तक की जिम्मेदारी महिलाओं पर रहती है। जिले के कई गांव है जहां शराब बनाने से लेकर बेचने तक का धंधा खुलेआम हाे रहा है लेकिन इस पर काेई कार्रवाई नहीं हाेती है औ न ही इसे राेकने का काेई प्रयास हाेता है।

इस दावे को सिर्फ तस्वीरों में ही नहीं हकीकत में भी देखने को मिल जाएंगे। तस्वीर में एक देसी शराब बनाने का सिस्टम की है एवं दूसरे में देसी शराब वह हड़िया बेचते हुए महिला की है। महिलाओं की ही जुबानी है कि घर में जो शराब की कारोबार है। उसे इस काम को घरेलू काम से भी बेहतर ध्यान से करना पड़ता है। घर में देसी शराब महुआ, बाखर और गुड़ से बनाते है।

बनाने के बाद जो रोजगार का साधन है। वह है मेला, दूर दराज के कहीं हाट बाजार या कोई भी आयोजन-कार्यक्रम में यह देसी शराब आदिवासी महिलाओं द्वारा खुलेआम बेचा जाता है। तस्वीर एक फुटबॉल टूर्नामेंट के आयोजन के दौरान का है। लगभग 20 से 25 हजार की भीड़ थी और इस आयोजन में चारों ओर देसी शराब और हड़िया की बिक्री आदिवासी महिलाओं द्वारा की जा रही थी। ऐसा अक्सर कार्यक्रमों में देखने को मिल जाते हैं।

कार्यक्रमों में शराब बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं है न प्रशासन पहुंचते हैं और न ही दंडाधिकारी। शराब पीने से जिले में अब तक न जाने कितनाें की माैत हाे गई और उनका घर तबाह हाे गया पबिया क्षेत्र सहित आस-पास के गांव व गोंदलीपहाड़ी गांव में एक परिवार शराब के कारण बर्बाद हो रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि हराधन सोरेन, बबलू सोरेन दोनों बाप बेटा है। दोनों ही शराब पीकर अक्सर घर में झगड़ा झंझट करता है। रोजगार करने कहीं भी बाहर नहीं जाता है।

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