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ईद:बकरीद: घराें में पढ़ी नमाज, मस्जिदों में सामाजिक दूरी का पालन

जामताड़ा8 दिन पहले
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  • त्याग और बलिदान का प्रतीक त्योहार बकरीद जिले में शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शहर से लेकर गांव तक पुलिस कर रही थी लगातार गश्त

जामताड़ा जिले भर में शनिवार को त्याग और बलिदान का प्रतीक त्योहार बकरीद शांतिपूर्ण तरीके से मनाया गया। जामताड़ा समेत ग्रामीण इलाकों में मस्जिद व ईदगाह में नमाज अदा नहीं की गई। बकरीद की नमाज अपने अपने घरों में अदा की गई और नमाज के बाद लोगों ने गले मिलने की बजाय दिल पर हाथ रख कर एक दूसरे को बकरीद की मुबारकबाद दी। लोगों ने सादगी पूर्ण वातावरण में सामाजिक दूरी का पालन करते हुए घरों में ही रहकर बकरीद मनाई और नमाज अदा की।

मस्जिदों में भी इमाम ने सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुए सिर्फ 5 से 6 लोगों के साथ नमाज अदा कराई और कोरोना संक्रमण से दिलाने के लिए दुआ की। बकरीद की नमाज के बाद सभी ने अपने अपने घरों में बकरे की कुर्बानी दी गई। इस बार भी प्रशासनिक निर्देशों का पालन करते हुए मस्जिद व ईदगाह पर लोग नहीं पहुंचे कोरोना संकट के चलते बदले हुए हालातों में ईदगाह के बजाय लोगों ने घरों में ही परिवार के सदस्यों के साथ सामाजिक दूरी बनाते हुए अपने धर्म के अनुसार इसका पालन करना बेहतर समझा। प्रत्येक वर्ष ईदगाह व मस्जिदों में काफी संख्या में समाज के लोग बकरीद के दिन नमाज अदा करने के उपरांत एक दूसरों को बधाइयां देते थे पर बदले हुए हालातों में ऐसा संभव नहीं हो पाया। पाकडीह व सरखेलडीह जामा मस्जिद के इमाम हाफिज कमरुद्दीन ने बताया कि कोरोना संकट के कारण बकरीद का त्याेहार हम सब ने अपने-अपने घरों में ही मनाया क्योंकि सरकार एवं जिला प्रशासन का आदेश है कि सोशल डिस्टेंस का पालन करें और घरों में रह कर नमाज अदा करें जिले भर के सभी मस्जिदों के इमामों ने समुदाय के लोगों से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मस्जिदों एवं ईदगाहों के बजाय घरों पर ही बकरीद की नमाज अदा करने और सादगी से बकरीद मनाने का आह्वान किया था जिसका पूरे जिले में असर देखने को मिला।

बकरीद के मौके पर बाजारों में भी बहुत कम संख्या में लोग नजर आए हालांकि प्रशासन एवं पुलिस की तरफ से बकरीद को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुभाष चौक जामा मस्जिद के इमाम मौलाना नजीरुद्दीन ने कहा कि ईद उल अजहा बलिदान और संयम का दिन है इस्लामिक कैलेंडर के अंतिम माह जिलहिज्जा की दसवीं तारीख को यह पर्व मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कुर्बानी आत्मा को शुद्ध करने का एक उत्तम साधन है। उन्होंने कहा कि कुर्बानी में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दिखावे के लिए न हो।

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