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निर्देश:24 घंटे बाद भी सदर अस्पताल के डायलिसिस केंद्र के लिए नहीं मिले डॉक्टर

जामताड़ा8 महीने पहले
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  • केंद्र संचालक पर मंडराने लगे हैं काले बादल, रोज 14 मरीजाें की हाेती थी डायलिसिस, एक दिन पूर्व ही डीसी ने निरीक्षण के दौरान दिए थे निर्देश

24 घंटे से अधिक का समय बीतने के बाद भी संचालक को चिकित्सक नहीं मिल पाया है। हांलाकि संचालक द्वारा इस दिशा में सकारात्मक पहल किया जा रहा है। शहर तथा आसपास के शहरों के चिकित्सकों से संपर्क किया जा रहा है। साथ हीं सदर अस्पताल के चिकित्सकों से भी संपर्क किया जा रहा है। इस संंबंध में केंद्र के समन्वयक अभिमन्यु मिश्रा ने बताया कि स्थानीय स्तर पर चिकित्सक की कमी है। जो चिकित्सक हैं उनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक की है। जिस कारण से चिकित्सक समय नहीं देना चाहते हैं।

डायलिसिस केंद्र के पुन: संचालन पर काले बादल छा गये हैं। इसका कारण केंद्र संचालकों को डॉक्टर का नहीं मिलना है। केंद्र में लाेगों का डायलिसिस विगत आठ दिनों से बंद है। आठ दिनों में डायलिसिस के अभाव में एक मरीज की मौत हो चुकी है। वर्तमान में 14 ऐसे मरीज हैं जिन्हें सप्ताह में दो और तीन डायलिसिस की आवश्यकता है। जिनका डायलिसिस समय पर नहीं हो पा रहा है। जिस कारण मरीज के परिजन परेशान हो रहे हैं।

फिलहाल देवघर या पश्चिम बंगाल जाना पड़ता है जिले के मरीजों को

ऐसे मरीजों के परिजन को डायलिसिस के लिए देवघर या पश्चिम बंगाल के विभिन्न शहरों का रूख करना पड़ रहा है। जिस कारण से गंभीर मरीज में कोरोना का संक्रमण होने का खतरा बढ रहा है। वहीं मरीज के परिजन को आर्थिक संकट के साथ साथ परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है। डीसी फैज अक अहमद मुमताज ने डायलिसिस केंद्र के संचालन को लेकर केंद्र संचालक को आवश्यक निर्देश देते हुए 48 घंटे में डॉक्टर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। डीसी ने केंद्र संचालन के लिए मंगलवार को संचालक से वार्ता कर आवश्यक निर्देश दिया। साथ हीं सदर अस्पताल का भी निरीक्षण किया।

डायलिसिस मरीजों को हो रही है परेशानी : जानकारी के अनुसार एक अन्य डायलिसिस रोगी तपन कुमार दास की स्थिति भी बिगड़ती जा रही है। जिनका लास्ट डायलिसिस देवघर में हुआ था। लेकिन वो अब 80 किमी दूर देवघर जाने में असमर्थ है। जामताड़ा में वैसे डॉक्टरों की संख्या काफी कम है।

बंद होने का कारण : डॉक्टर के अभाव में तकनीशियन द्वारा मरीजों का डायलिसिस किया जाता था। इसी दौरान गत 30 जून को एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इस मौत के बाद चिकित्सक का कुछ समय तक व्यवस्था संचालकों द्वारा किया गया था। परंतु स्थायी तौर पर चिकित्सक की व्यवस्था नहीं होने के कारण केंद्र का संचालन बंद है।

चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. सौरव ने किया योगदान : सदर अस्पताल जामताड़ा में एक चिकित्सक ने योगदान दिया है। डॉ. सौरव ने योगदान दिया है। पूर्व में भी वे सदर अस्पताल में पदस्थापित थे। परंतु पढाई के लिए बाहर चले गए थे। सरकार के स्तर से पुन: उनकी पदस्थापना सदर अस्पताल में किया गया है।

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