अच्छी पहल:वन विभाग ने पंछियों के संरक्षण के लिए 5000 पौधे लगाए, ताकि उन्हें खाना भी मिल सके और रहने के लिए जगह भी...

जामताड़ाएक महीने पहले
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  • पेड़ों की घटती संख्या के कारण पक्षियों की कई महत्वपूर्ण प्रजातियां विलुप्त होती जा रही हैं : डीएफओ

वन विभाग जामताड़ा द्वारा पंछियों के संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास किया जा रहा है। पंछियों को भोजन मिल सके इसके लिए विभाग द्वारा जिले के विभिन्न प्रखंडों में 5000 से अधिक पौधे लगाए जा रहे हैं। जिस तरह मनुष्य अपने भोजन के लिए पेड़-पौधों पर निर्भर है, उसी प्रकार से पेड़-पौधे पक्षियों के भोजन का भी मुख्य जरिया हैं। लेकिन समय के साथ वृक्ष घटते जा रहे हैं और पक्षियों के लिए भोजन के विकल्प कम होता जा रहे हैं।

ऐसे में वन विभाग ने नायाब पहल करते हुए ऐसे उन पेड़ों का पौधारोपण कर रहा है जिनसे पक्षियों को खाना मिलता है। बता दें कि आसमान में उड़ने वाले पक्षी अपने भोजन के लिए पूरी तरह से पेड़-पौधों पर ही निर्भर हैं। गुलर, पीपल, डूमर, पाकर, लेसुआ, सिरस, मोरिगा, नीम आदि ऐसे पेड़ हैं।

जिनकी पत्तियां, फलियां या फिर बीज का पक्षी सेवन करते हैं, लेकिन बीते कुछ सालों से पेड़ों की घटती संख्या के कारण पक्षियों की कई महत्वपूर्ण प्रजातियां विलुप्त होती जा रही हैं। ज्यादातर पक्षी अपना भोजन पेड़ों से ही प्राप्त करते हैं। कुछ पक्षी पेड़ों के बीच या उन पर लगने वाले फलों को खाकर पेट भरते हैं। जामताड़ा जिले में पक्षियों के संरक्षण के लिए वन विभाग द्वारा 5000 पौधे लगाए जा रहे हैं।

साल दर साल कम होते पेड़ों की संख्या से पक्षियों की संख्या घटी है

पेड़ों की संख्या साल दर साल कम होती जा रही है। पड़ों की संख्या घटने से ना जाने पर्यावरण असंतुलित होने के साथ ही ना जाने कितने पक्षियों का निवाला छिन गया है। हालांकि वन विभाग पौध रोपण पर जोर दे रहा है और इस साल 5000 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। जामताड़ा जिले के नारायणपुर, कुंडहित, फतेहपुर, नाला सहित विभिन्न क्षेत्रों में इन पौधों को लगाया जा रहा है।

संरक्षण को लेकर वन विभाग जामताड़ा काफी गंभीर है। पंछियों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो इसके लिए विभाग द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इसके लिए जागरूक भी किया जा रहा है। पर्यावरण के संतुलन बनाए रखने में पंछियों का महत्वपूर्ण योगदान है।

जिला में कुछ खास किस्म के पेड़ों को अधिक लगाने पर फोकस किया जा रहा है, जिनसे पक्षियों को निवाला मिलता है। जैसे बरगद, पीपल, डूमर, पाकर की फलियां बीज पक्षी खाते हैं। इसलिए एेसे ही पेड़ों को लगाया जा रहा है, ताकि पक्षियों को खाना के साथ-साथ ठिकाना भी मिल सकेगा। इस केटेगरी के 5000 हजार से अधिक पौधे लगाए जा रहे हैं। -अजिंक्य देवीदास, डीएफओ, जामताड़ा

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