नई व्यवस्था:अप्रैल से शिक्षक पहले खुद के पैसों से करेंगे काम, फिर बिल जमा करेंगे तब होगा भुगतान

जामताड़ाएक महीने पहले
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  • खर्च की पूर्ण विवरणी व लेखा अभिलेख प्रखंड स्तर पर संधारित हो सकेगा

जिले के 1030 सरकारी स्कूलों में चालू वित्तीय वर्ष में नई वित्तीय व्यवस्था लागू हो गई है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने जामताड़ा को साढ़े 12 करोड़ रुपए आवंटित करते हुए अब स्कूलों को नई वित्तीय व्यवस्था के तहत पैसों का भुगतान करने को कहा है।

नई वित्तीय व्यवस्था को शिक्षक थोड़ा कठिन बता रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों को पहले उधारी में काम कराना होगा अथवा उससे पहले बिल लेकर जमा करना होगा। उसके बाद ही पैसे का भुगतान संभव है। चालू वित्तीय वर्ष अप्रैल से शुरू है। नवंबर के अंत में स्कूल अनुदान का पैसा मिला है। परेशानी यह है कि चालू वित्तीय वर्ष में नवंबर से पहले 8 महिने तक स्कूलों में कई तरह के खर्च उधार पर हुए हैं। अब संबंधित व्यक्ति को भुगतान करने के लिए दुकानदार या सप्लायर से बिल लेना पड़ेगा। उसके बाद प्रखंडों को भेजा जाएगा। स्कूलों के सचिव पीएफएमएस पोर्टल पर भुगतान के लिए बिल सहित अन्य ब्यौरा देकर मेकर के रूप में अपलोड करेंगे।

यह प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सह समन्वयक के पास जाएगा। बीईईओ के स्तर से एप्रूव होने के बाद प्रखंड स्तर पर इस भुगतान से संबंधित राशि बैंक को उपलब्ध कराया जाएगा। प्रखंड के लेखापाल सह कंप्यूटर ऑपरेटर समन्वय की भूमिका निभाएंगे। स्कूलों के लिए अच्छी बात यह है कि स्कूलों से संबंधित खर्च की पूर्ण विवरणी प्रखंड स्तर पर संधारित किया जाएगा। स्कूलों के सचिव सह प्रधानाध्यापक प्रबंधन समिति के अध्यक्ष से संबंधित बिल पारित कराकर पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

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