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आस्था:पापमाेक्षिनी एकादशी आज, भगवान विष्णु की पूजा करने वाले जातक को मिलती है सभी पापाें से मुक्ति

जामताड़ा10 दिन पहले
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  • हाेली व नवरात्रि के बीच पड़ती है पापमाेक्षिनी एकादशी, सूर्याेदय से लेकर पूरे दिन रहेगी एकादशी

चैत्र महीने के कृष्णपक्ष की पापमोक्षिनी एकादशी 7 अप्रैल को रहेगी। एकादशी तिथि खासतौर से भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन उनकी पूजा विशेष फल देने वाली होती है। पापमोक्षिनी एकादशी का विशेष महत्व है, जो होली और नवरात्रि के बीच में पड़ती है। नाम के मुताबिक इस एकादशी पर व्रत व पूजा करने से तमाम तरह के पाप और तकलीफों से छुटकारा मिलता है। इस दिन अन्न व जलदान करने से कई गुना पुण्य मिलता है।

व्रत में पीले कपड़े पहनना फलदायी, अन्न व जलदान से मिलता है पुण्य

पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान कृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि राजा मान्धाता ने एक समय लोमश ऋषि से जब पूछा कि प्रभु यह बताएं कि मनुष्य जो जाने-अनजाने पाप कर्म करता है उससे कैसे मुक्त हो सकता है। राजा को जवाब देते हुए ऋषि ने कहानी सुनाई कि चैत्ररथ नाम के वन में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या में लीन थे। इस वन में एक दिन मंजुघोषा नाम की अप्सरा की नजर ऋषि पर पड़ी तो वो उन पर मोहित हो गई। उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करने लगी। जिससे ऋषि की तपस्या भंग हो गई। इससे गुस्सा होकर उन्होंने अप्सरा को पिशाचिनी बनने का श्राप दे दिया। अप्सरा दुःखी होकर वह ऋषि से माफी मांगने लगी और श्राप से मुक्ति के लिए प्रार्थना करने लगी। ऋषि ने उसे विधि सहित चैत्र कृष्णपक्ष एकादशी का व्रत करने के लिए कहा। इस व्रत से अप्सरा पिशाच योनि से मुक्त हो गई।

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