स्वावलंबी महिलाएं:ऑर्गेनिक तरीके से कपास से सेनेटरी पैड्स बनाकर सुनीता ने छह और महिलाओं काे बनाया स्वावलंबी

जामताड़ा9 महीने पहले
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खुद से निर्मित किया सखी सेनेटरी पैड दिखातीं महिलाएं। - Dainik Bhaskar
खुद से निर्मित किया सखी सेनेटरी पैड दिखातीं महिलाएं।
  • मात्र दसवीं पास महिला ने सशक्तिकरण व उन्मुखीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया, लोग कर रहे है तारीफ

अपमान नहीं, सम्मान ही सम्मान खुद कभी मजदूर थी। लेकिन आज दे रही हैं दूसरे को रोजगार। जी हां महिला सशक्तिकरण और उन्मुखीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। जामताड़ा प्रखंड के बुधुडीह गांव की ग्रामीण महिला। कक्षा आठ में पढ़ने के दरमियान ही पिता की मृत्यु हो गई। जिससे इनको मजदूरी तक करना पड़ा। लेकिन हार नहीं मानी।

इनकी जीवटता आज समाज के सभी लोगों के लिए अनुकरणीय है। यह कहानी है सुनीता हांसदा की। उन्होंने जामताड़ा जैसे पिछड़े और ग्रामीण इलाके से आने के बावजूद एक स्टार्टअप शुरू किया। अपने स्टार्टअप में 6 महिलाओं को रोजगार भी दिया। इनके द्वारा ऑर्गेनिक सेनेटरी पैड्स का निर्माण किया जा रहा है। उस स्टार्टअप का नाम रखा सखी। सुनने में जितना आसान लगता उतना आसान इनका सफर रहा नहीं। सुनीता हांसदा केवल दसवीं पास है। लेकिन जज्बा समाज के लिए कुछ कर गुजरने का।

यहीं जज्बा इन्हें गुजरात के बड़ोदरा स्थित वात्सल्य फाउंडेशन तक खींच ले गया। जहां ऑर्गेनिक सेनेटरी पेड बनाने की विधि का प्रशिक्षण इनके द्वारा लिया गया। यह बात है वर्ष 2017 की। प्रशिक्षण के बाद जब मौका आया स्टार्टअप शुरू करने की तो सबसे बड़ी बाधा उत्पन्न हुई पैसे की।

यह बाधा दूर हुई वर्ष 2020 में एलआईसी ने इन्हें स्टार्टअप शुरू करने के लिए ऋण दिया। उसके बाद तैयार सेनेटरी पैड्स को बेचा कहां जाएं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया गया। लेकिन बात बनी नहीं। बिना किसी जिला प्रशासन के सहयोग से खुद अपने जान पहचान वालों या कहीं शादी समारोह में पहुंचकर अाॅर्गेनिक सेनेटरी नैपकिन के बारे में प्रचार कर बेचना शुरू किया।

ऑर्गेनिक तरीके से कपास से बने सेनेटरी पैड्स

सुनीता कहती हैं सेनेटरी पैड्स तो कई कंपनियां बना रही हैं। जिनमें ज्यादातर विदेशी हैं। यह लोग इसमें प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हैं। जो हेल्थ के लिए ठीक नहीं है। महिलाओं को पीरियड के दौरान तकलीफ न हो और वे पूरी तरह सुरक्षित रहें। इसलिए हमने ऑर्गेनिक तरीके से कपास से बने सेनेटरी पैड्स लॉन्च किए हैं। इसमें किसी भी तरह के केमिकल या प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

महिलाओं को रोजगार

इनके इस स्टार्टअप में 6 महिलाओं को रोजगार भी मिला।ये आसपास की ग्रामीण महिलाएं है। स्टार्टअप में काम कर रही वर्णिता मुर्मू, मामूनी मुर्मू, सुष्मिता मुर्मू, रीना, पूर्णिमा, फुलकुमारी का कहना है, घर के बगल में ही काम मिल गया और आर्थिक रूप से सबल भी सुनीता दीदी के कारण हो गए। अब जीवन में अपमान नहीं सम्मान ही सम्मान है।

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