वैकल्पिक व्यवस्था:इन्हें चाहिए रोजगार, काम नहीं मिलने से महाराष्ट्र और गुजरात पलायन करने को मजबूर हैं मजदूर

जामताड़ा6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • लॉकडाउन खुला तो बालू खनन बंद, बालू के अभाव में ठप हो गई विकास योजनाएं तो बेरोजगार हो गए मजदूर

राज्य सरकार द्वारा बालू खनन पर रोक लगाए जाने के बाद कंट्रक्शन से जुड़े राजमिस्त्री और मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। पिछले दो-तीन महीने से इन मजदूरों के समक्ष काम के अभाव में आर्थिक समस्या उत्पन्न हो गई है। कई परिवार तो दो वक्त की रोटी को मोहताज हो रहे हैं। सरकार द्वारा बालू की वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना खनन पर रोक लगा दिया जाने से भवन व सरकारी काम बंद पड़े हैं जिसके कारण डेली मजदूरी पर काम करने वाले मजदूरों को काम मिलना भी बंद हो गया है।

वहीं बालू के अभाव में कई विकास योजनाएं भी अधूरी पड़ी हुई है। इससे मजदूरों का आक्रोश गहराता जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि पहले लॉकडाउन में वैसे ही रोजगार बंद हो गए हैं। जिले में लगभग एक लाख मजदूर एेसे हैं जो डेली हाजिरी पर काम करते हैं। किसी तरह लॉकडाउन का समय पार हुआ तो लगा कि अब कुछ बेहतर होगा लेकिन तब तक बालू उठाव व खनन पर रोक लग जाने से निर्माण काम बंद हो गया है।

जिससे हमलोगों को मजदूरी का काम मिलना भी बंद हो गया है। सुबह काम पर निकलते हैं लेकिन काम नहीं मलने पर घर लौट जाते हैं। जामताड़ा शहर से सटे पाकडीह गांव के राजमिस्त्री लालू अंसारी ने भास्कर को बताया कि पहले लॉकडाउन में काम ठप था और जब काम शुरू हुआ तो बालू की आपूर्ति बंद हो गई है जिससे मजदूरों का पेट पालना मुश्किल हो गया है कई राज मिस्त्री व मजदूर भूखे पेट सो रहे हैं।

जिले में बालू खनन पर आश्रित हैं हजारों परिवार
जामताड़ा जिले में रोजगार के कई अवसर नहीं है यहां ना तो औद्योगिक इकाइयां है और ना ही कुटीर उद्योग ही जिससे मजदूर अपना गुजारा कर सके। ऐसे में कंस्ट्रक्शन का काम है एकमात्र ऐसा था जहां हर दिन हजारों मजदूरों को रोजगार मिल जाता था। सुबह से शाम तक सड़क निर्माण हो यह भवन निर्माण उसमें मजबूर हाड़ तोड़ मेहनत करते थे। जिस जगह पर बालू का थोक व्यवसाय होता था वहां भी सैकड़ों मजदूर बालू की ढुलाई में लगे रहते थे, लेकिन सरकार के फैसले के बाद एक झटके में ही यह सभी बेरोजगार हो गए हैं।

बालू के अभाव में अधूरी पड़ी हैं कई योजनाएं
बालू के अभाव में ना सिर्फ मजदूरों की जिंदगी बदरंग हो गई है बल्कि सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाएं भी अधूरी पड़ी हुई है। जिससे निर्धारित समय पर योजनाओं को पूरा कराना सरकार के लिए चुनौती बन गई है। बता दें कि जिला मुख्यालय प्रखंड मुख्यालय पंचायत मुख्यालय क्षेत्र के दर्जनों योजनाओं का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। कई सरकारी पदाधिकारी भी नाम नहीं खोलने का तत्पर बता रहे हैं कि बालू के अभाव में समय परियोजनाओं को पूरा करवाना मुश्किल काम है।

मजदूरों ने कहा- पहले लॉकडाउन ने मारा अब बालू ने
पहले लॉकडाउन के दौरान जब बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर यहां आए थे तो मुख्यमंत्री ने कहा था कि उन्हें यहीं पर रोजगार दिया जाएगा लेकिन नए रोजगार के सृजन की बात तो दूर पहले से जो मजदूर निर्माण काम में लगे थे उनके भी रोजगार छिन गए हैं। जिससे मजदूरों की स्थिति दयनीय हो गई है। सैकड़ों मजदूर भुखमरी के कगार पर खड़े है। धान की रोपनी होने के बाद अब स्थानीय स्तर पर कोई रोजगार भी नहीं बचा है, जिससे कि परिवार को दो वक्त की रोटी खिला सके। ऐसे में बालू खनन पर रोक लगाए जाने के बाद मजदूरों को पलायन के सिवाय दूसरा कोई चारा भी नहीं है।

खबरें और भी हैं...