खुदा का शुक्र है:2 घंटे बाद भी होनी थी ईशा की नमाज, इस बीच मस्जिद हुई जमींदोज, बाल-बाल बचे लोग

कतरास2 महीने पहले
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जमींदोज मस्जिद - Dainik Bhaskar
जमींदोज मस्जिद
  • गोफ में समाई तेतुलमुड़ी 22-12 की जामा मस्जिद, 10 मिनट पूर्व हुई थी मगरिब की नमाज
  • घटना के समय खाली थी मस्जिद, इसलिए हादसा टला

तेतुलमुड़ी 22-12 बस्ती की घनी आबादी के बीच स्थित इलाके की शान कहलाने वाली जामा मस्जिद बुधवार की शाम जमींदोज हो गयी। मस्जिद के बरामदे में जोरदार आवाज के साथ बने विशालकाय गोफ में मस्जिद का सत्तर फीसदी हिस्सा समा गया। इस गोफ में 50 फीट की मीनार सहित करीब छह लाख रुपए मूल्य की संपत्ति समा गई। घटना मगरिब की नमाज खत्म होने के 10 मिनट बाद ही शाम 6:30 बजे हुई। जिस समय घटना घटी उस वक्त मस्जिद में कोई नहीं था।

सभी मस्जिद के बाहर थे। मौलाना भी बाहर थे, जबकि मोअज्जिन और अन्य कई लोग मस्जिद की सीढ़ियों पर बैठकर बातचीत कर रहे थे। नमाज के वक्त दर्जनों लोगों की जमआत थी। वहीं दो घंटे बाद ईशा की नमाज अदा की जानी थी। घटना के बाद मुहल्ले में कोहराम मच गया। अनहोनी की आशंका से लोग अपने घरों से बाहर निकल गए।

कुछ देर के लिए मौके पर अफरातफरी का माहौल कायम हो गया। अभी लोग कुछ समझ ही रहे थे कि तभी 8:04 बजे मस्जिद का कुछ हिस्सा एक बार फिर जमीन में समा गया। चश्मदीदों की माने तो अचानक जोरदार आवाज के साथ गोफ बन गया और सब कुछ जमींदोज हो गया। देखते ही देखते मस्जिद के पास लोग इकट्ठा हो गए।

आक्रोशित लोग बीसीसीएल को कोसते हुए जमकर विरोध करने लगे। कुछ आक्रोशित लोगों ने गांव के बगल में संचालित आउटसोर्सिंग पैच के कार्य को बंद करा दिया। घटना की सूचना पर जोगता थानेदार पंकज वर्मा सदल-बल पहुंच विधि व्यवस्था संभालने में जुट गए।

इससे पहले 2013 में गांव की छोटी मस्जिद भी हुई थी जमींदोज

बस्ती की छोटी मस्जिद वर्ष 2013 में जमींदोज हो चुकी है। अब एक छोटा-सा गुंबद लोगों को सिर्फ उसकी याद दिलाती है। इसके साथ ही कई घर जमींदोज हो चुके हैं। पूरा इलाका दरारों से पटा है। सरकारी स्कूल को अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया है। कई लोग खुद भय से इलाका छोड़ अन्यत्र चले गए हैं। इस घटना के बाद बीसीसीएल ने भी अपने कर्मियों को अविलंब कंपनी आवास खाली करने का आदेश दिया था।

बस्ती में रैयतों की आबादी है दो हजार
तेतुलमुड़ी 22-12 बस्ती को जरेडा एवं बीसीसीएल ने डेंजर जाेन घोषित कर रखा है। यहां 250 रैयत घर में करीब 2 हजार की आबादी रहती है। यह मस्जिद वर्ष 1981 में बनी थी। फिलहाल गांव वालों ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से धराशाई मस्जिद के चारों ओर घेराबंदी कर दी। गांववाले अपने दरवाजे के समीप डर के साए में जमे हुए हैं।

लोगों का सुरक्षित पुनर्वास प्राथमिकता
गांववालों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। गांव वालों से वार्ता करके विस्थापन की समस्या का भी समाधान किया जाएगा। हम चाहते हैं कि गांव वालों का सुरक्षित रूप से पुनर्वास हो जाए। इसके लिए प्रशासन से मदद लेंगे और हेडक्वार्टर से इस संबंध में बात करेंगे, ताकि समस्याओं का हल निकल जाए।'' -पीके दुबे,जीएम, सिजुआ एरिया, बीसीसीएल

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