वातावरण प्रदूषित:पीवीसी पाइप निर्माण में लेड के इस्तेमाल पर रोक इससे पाइप का दाम दोगुना होगा, ग्राहकों पर बोझ

कुमारधुबी2 महीने पहलेलेखक: दीपक सिंह
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  • केंद्र सरकार ने आज से आईएसआई मार्क युक्त पीवीसी पाइप निर्माण का दिया है निर्देश...

जिले में पीवीसी पाइप बनाने वाली कंपनियाें काे अब पाइप निर्माण में लेड लगाने पर राेक लगा दी गई है। केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालयय की ओर से जारी निर्देेश के बाद 30 सितंबर से यह नियम लागू हाे जाएगा। इसके अलावा पाइप में आईएसआई मार्क भी लेना जरूरी हाेगा। इससे पीवीसी पाइप बनाने वाली कंपनियाें का तनाव बढ़ गया है, क्याेंकि लेड का इस्तेमाल नहीं हाेने से पाइप निर्माण में दाेगुना काॅस्ट लगेगा।

पाइप का निर्माण पहले लेड, रेजिन व वेस्ट प्लास्टिक मैटेरियल से किया जाता था। वेस्ट प्लास्टिक मैटेरियल काे गलाकर पाइप का निर्माण किया जाता है, लेकिन अब लेड का उपयोग नहीं करना है। अगर आईएसआई मार्क लेना जरूरी हाे गया ताे सभी कंपनियाें काे रेजिन से पाइप बनाना काफी महंगा पड़ेगा। ऐसे में भविष्य में पाइप की कीमत में इजाफा होना तय माना जा रहा है। पाइप निर्माताओं का कहना है कि दाम दोगुना हो जाएगा।

जिले में पाइप निर्माण की 8 फैक्ट्रियां, लागत होगी दोगुनी
जिले में पाइप निर्माण करने वाली करीब 8 छाेटी-बड़ी कंपनियां हैं। पाइप बनाने में पहले 70 रुपए प्रतिकिलाे काॅस्ट आता था, जाे अब बढ़कर 140 रुपए तक हाे जाएगा। ग्राहक काे पहले आधा इंच पाइप 10 फीट 200 रुपए में मिलता था, लेकिन अब 400 रुपए में मिलेगा। इसी तरह 6 इंच का पाइप पहले 1350 रुपए में मिलता था, लेकिन अब 2700 रुपए में मिलेगा। अब पाइप निर्माण में निर्माता को जहां दुगने पूंजी की जरूरत होगी ताे वहीं उपभोक्ताओं को भी दुगनी कीमत चुकानी पड़ेगी। बोरिंग में इस पाइप का इस्तेमाल होता है। इससे बोरिंग करने का कॉस्ट दोगुना हो जाएगा ताे उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ जाएगी।

वेस्टेज प्लास्टिक मैटेरियल का उपयाेग नहीं हाेने से पड़ेगा वातावरण पर असर
इधर, वेस्टेज प्लास्टिक मैटेरियल का उपयोग नहीं होने से वातावरण पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वेस्ट प्लास्टिक मैटेरियल का रीसाइकिल बंद हो जाएगी ताे बड़ी मात्रा में वेस्ट प्लास्टिक धरती पर जमा होगा, जो वातावरण को प्रदूषित करेगा। पीवीसी पाइप कंपनी के संचालक ने बताया कि मई 2017 के फैसले में ट्रिब्यूनल के एक स्पष्ट खोज में आया था कि लेड युक्त पीवीसी उत्पाद स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक है। इसे पूरी तरह इस्तेमाल करने से चरणबद्ध तरीके से हटाया जाना चाहिए, लेकिन इस आदेश को चरणबद्ध तरीका न अपनाकर अचानक लागू कर दिया गया। ऐसे में उद्यमी न्यायालय की शरण में जा सकते हैं।

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