महिला शक्ति:परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को पूरा कर रहीं हैं महिलाएं

मिहिजाम9 महीने पहले
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सरिता यादव। - Dainik Bhaskar
सरिता यादव।

संस्कृत में एक श्लोक है- ‘यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमयंते देवता:। अर्थात्, जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। महिलाओं की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उत्सव के रूप में हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। कई ऐसी महिलाएं हमारे समाज के बीच से ही होती हैं जो अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ साथ अपने सपनों को उड़ने के लिए पंख देती है।

मिहिजाम की अफसर बिटिया अभिलाषा कुमारी शर्मा की सफलता सब जानते हैं, आज अभिलाषा सीतामढ़ी की जिला अधिकारी हैं और बिहार में अच्छे प्रशासनिक अधिकारियों में गिनी जाती हैं।आज बात करते हैं मिहिजाम के राजबाड़ी स्थित होमियोपैथी अस्पताल की चिकित्सक सरिता यादव जो एमओ के पद पर विगत कई वर्षों से निःशुल्क रोगियों की देख रेख कर रही है।

सरिता यादव मिहिजाम होमियोपैथी कॉलेज के अध्यापक नंद यादव की पुत्री है। सरिता बताती है कि कम उम्र में शादी होने के दौरान घर के कामकाज के साथ पढ़ाई-लिखाई की दोहरी जिम्मेदारी निभाना बहुत मुश्किल था। चिकित्सक बनने की सपना मन की आकांक्षाएं दम तोड़ती नज़र आने लगी। कई दोस्तों, रिश्तेदारों ने मनोबल तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ा। लेकिन मन में दृढ़ इच्छाशक्ति, संकल्प लेकर पिता और पति के सामने अपनी इच्छा रखने में कामयाब रही, मैं उन खुशकिस्मत महिलाओं में रही जिनके सफलता के पीछे पुरुष का योगदान रहा।

पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सरिता ने अथक परिश्रम से अपने सपनों को पंख दिया। जामताड़ा के एक निजी अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ अब गाइनो विभाग में भी योगदान दे रही हैं। परिवार के साथ साथ अपने सपनों को साकार कर रही सरिता उन महिलाओं के लिए प्रेरक हैं जो शादी के बाद अपने सपनों को चूल्हा चौका में झोंक देती हैं।

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