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अब लाैट चलें:लॉकडाउन में लौटे मजदूरों को काम नहीं मिला तो कर रहे पलायन

मिहिजाम8 महीने पहले
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  • अपने गांव लाैटते समय दुबारा नहीं लाैटने की कसमें खाने वाले भी हुए मजबूर

वैश्विक महामारी कोरोना के परिदृश्य हुए लॉकडाउन के दौरान कई मजदूर काफी जद्दोजहद करके बस से तो कई पैदल तो कई मजदूर ट्रेन से किसी तरह अपने गांव व शहर जामताड़ा व मिहिजाम पहुंचे थे। रोजगार की तलाश में दूसरे प्रदेशों में पलायन करने वाले मजदूर जब वापस आए तो कसम खाने लगे थे कि अब अपने शहर व गांव छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे। लेकिन जितनी तेजी से मजदूर वापस आए थे पलायन की रफ्तार भी तेज दिख रही है। अपने शहर व आसपास में काम नहीं मिलने के कारण मजदूरों का पलायन लगातार जारी है। मिहिजाम के केलाही, पियालसाेला, गाेराईनाला, कुसबेदिया, मुर्गाटाना, महुलबना, केवटजाली सहित दर्जनाें गांवाें से मजदूराें का पलायन धीरे-धीरे जारी है। यदि ट्रेन मिलनी शुरू हाे जाए ताे यह रफ्तार बढ़ जाएगी।फिलहाल रोजाना 30-40 मजदूर लौट रहे हैं।

बिना निबंधन कराए मजदूर कर रहे पलायन

बिना निबंधन के भी बहुत सारे मजदूर पलायन कर रहे हैं। आधी रोटी खाएंगे गांव छोड़कर नहीं जाएंगे का नारा भी विफल होता दिख रहा है। जो मजदूरों ने एक स्लोगन बनाया था वो फेल हो गया। 24 मार्च को देश में लॉकडाउन लगते ही देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में गुजरात, राजस्थान, चेन्नई, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, कर्नाटक, मुम्बई, दिल्ली, पंजाब आदि स्थानों के मजदूर घर वापस आने लगे थे। प्रवासी मजदूर काफी चुनौतियों, मुसीबतों को झेलते हुए घर लौटे थे। इस दौरान कई मजदूरों ने पैदल चलकर अपनी आखिरी सांस तक भी ली। जिस कारण मजदूरों ने घोर परेशानी और कोरोना के डर से कसम खा ली थी कि आधी रोटी खाएंगे लेकिन अपने शहर व गांव को छोड़ कर कहीं पलायन नहीं करेंगे।

मजदूराें का दर्द

मजदूर मनीष कुमार मिहिजाम के रहने वाले है ने कहा कि लाॅकडाउन में जब बड़ी मुसीबताें काे झेलकर वापस लाैटा ताे कसम खा लिया था कि अब दुबारा काम के लिए दूसरे प्रदेश नहीं जाऊंगा। लेकिन वापस जाने को अब मैं मजबूर हूं।

माे. समीर कहते हैं कि यहां काम करिये ताे दिन भर की मजदूरी दाे से ढ़ाई साै मिलती है। इतनी ही मेहनत हमलाेग दूसरे प्रदेश में करते हैं ताे 5 से 6 साै रुपए मिल जाते हैं। काम भी हर समय उपलब्ध रहता है। इसलिए यहां रहना मुश्किल है।

मिहिजाम बस स्टैंड में रोज पहुंच रहे हैं मजदूर

6 माह से ज्यादा समय तक रहने के बाद भी जब यहां रोजगार नहीं मिला तो अब पेट की आग ने वापस पलायन करने को विवश कर दिया है। कुछ मजदूरों ने बताया कि पहले वे चेन्नई में काम करते थे। कुछ ने अन्य प्रदेशों में जाने की बात कही। वहीं मिहिजाम बस स्टैंड में रोज दर्जनों मजदूर बस की राह देखते हुए नज़र आ सकते हैं। मजदूरों ने कहा हेमंत सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है। झारखंड जन जागृति मंच के संयोजक राकेश लाल ने कहा हेमंत सरकार ने गांव में ही मजदूरों को काम देने का वादा किया था। उसमें पूरी तरह विफल हो गई है। 7 माह से लगातार घर पर ही बैठे रह गए मजदूर लेकिन किसी को भी रोजगार नहीं मिला है। जो काफी चिंतनीय विषय है।

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