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स्वावलंबन:मधुमक्खी पाल स्वरोजगार से जुड़ रहे हैं युवा

नाला12 दिन पहले
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  • अब दूसरे गांवाें के युवा भी इस व्यवसाय से जुड़ने का कर रहे हैं प्रयास, प्रशासन से मांगी मदद

जिले की आबोहवा मधुमक्खी पालन के लिए काफी उपयुक्त माना जाता है। इतना ही नहीं कम पूंजी, कम मेहनत और सीमित स्थान में इस कारोबार को शुरू कर आय के स्रोत को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए विभाग के द्वारा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। जामताड़ा जिला के नाला प्रखंड स्थित मथुरा गांव में कृषि विभाग के सौजन्य से इन दिनों सबुजा यान कृषि समिति के द्वारा मधुमक्खी पालन किया जा रहा है।

फिलहाल एक आम बगीचे में लगभग दो सौ बक्से में मधुमक्खी पालन कार्य पिछले तीन महीने से शुरू किया गया है। समिति के अध्यक्ष निर्मल कुमार माजि एवं सचिव दयामय मंडल ने कहा है कि दो फीट आकार के प्रति बक्सा से दो लीटर शहद तैयार होता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि एक पखवाड़े तक यानी शुक्लपक्ष तक छत्ते-बक्से की सिर्फ निगरानी की जाती है। प्राचीन मान्यता के अनुसार कृष्णपक्ष यानी अमावस्या के समय ही छत्ते से शहद निकाला जाता है। मक्खी डंक न मार सके इसलिए कृषि विभाग के द्वारा हेड मास्क सहित आवश्यक किट भी लाभुक समिति को दिया गया है। मधुमक्खी पालक माजि ने बताया कि समिति में कुल दस सदस्य हैं जिन्हें देखभाल और शहद निकालने का अलग अलग दायित्व सौंपा गया है।

उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन करने के लिए कृषि वैज्ञानिक गोपाल कृष्णन तथा जिला कृषि पदाधिकारी सबन गुड़िया ने पर्याप्त प्रशिक्षण प्रदान किया है। समय-समय पर उनका मार्गदर्शन भी मिलता है। मधुमक्खी पालकों में इस कारोबार के प्रति रूचि भी बढ़ने लगी है तथा रोजगार की उम्मीद से वे काफी उत्साहित भी हैं। मथुरा गांव के उन्नत किसान निर्मल माजी तथा अन्य सदस्य के द्वारा प्रारंभ किया गया इस कारोबार को देखने-समझने के लिए अब भिन्न-भिन्न गांव के लोग भी पहुंच ने लगे हैं। यह एक आमदनी का आसान जरिया भी माना जा रहा है। नाला प्रखंड सहित जिला का जो वातावरण है यहां मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देकर किसान के आय को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। जानकारी के अनुसार मथुरा गांव के मधुमक्खी पालक के सामने बाजार नहीं है तथा उत्पादित शहद को बेचने के लिए सोचना होगा। लेकिन खुले बाजार में तीन सौ रुपए प्रति लीटर दर सुनकर वे काफी खुश हैं। ऐसा माना जा रहा है कि जिला के सभी प्रखंड में इस तरह के मधुमक्खी पालन शुरू किया जाता तो पालकों में खरीफ और रबी के साथ साथ अलग से एक ओर रोजगार मिलता।

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