दवाओं की कीमत में भी तेजी से इजाफा:बीपी की 96% व गैस की दवा 42% महंगी थर्मामीटर तक के दाम में 120% का इजाफा

धनबाद8 महीने पहलेलेखक: जीतेंद्र कुमार
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  • मल्टीविटामिन से लेकर खांसी, शुगर की दवा का मूल्य 19 से 58% तक बढ़ा

कोरोना के बाद दवाओं के बिजनेस ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी। वहीं दवाओं की कीमत में भी तेजी से इजाफा हुआ। सामान्य दिनों की अपेक्षा दवाओं के कारोबार में 35 से 40 प्रतिशत से उछाल रहा। इस साल अगस्त से ही कीमताें में लगातार बढ़ाेतरी दर्ज हो रही है। खासकर बुखार, सर्दी, खांसी, ब्लड प्रेशर र शुगर की दवाओं के कीमत 5 लेकर 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वही कुछ कंपनियाें की बीपी, मल्टीविटामिन, शुगर की दवाओं की कीमतें 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी हैं।

दवा दुकानदार भी कबूलते हैं कि कोरोना के बाद दवा की कीमत बढ़ी है। जो दवा पहले 33 रुपए में उपलब्ध थी, अब 52 रुपए में मिल रही है। सरकार के स्तर से दाम बढ़ाए गए हैं। बीपी और शुगर जैसी दवाओं को ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर से केंद्रीय रसायन व उर्वरक मंत्रालय ने बाहर कर दिया है। इस कारण अभी इन दवाओं की कीमतों में वृद्धि हो रही है। दैनिक भास्कर ने दवाओं की बढ़ती कीमत को लेकर पड़ताल की। 10 से ज्यादा बीमारियों की दवाओं का एनालिसिस किया। इसमें न सिर्फ दवा के दाम बढ़े मिले, बल्कि बुखार मापने के यंत्र के दाम में भी 120% से ज्यादा वृद्धि पाई।

दवाओं की कीमत बढ़ने के 3 कारण

1. काेराेना शुरू होते ही दवा बनाने के लिए चीन से आने वाला राॅ मेटेरियल बंद हाे गया है। केंद्र सरकार दूसरे देशाें से राॅ मेटेरियल मंगवा रही है। चीन से आने वाला राॅ मेटेरियल की कीमत अन्य देशाें की तुलना में कम है जबकि दूसरे देशाें से महंगा रॉ मेटेरियल मिल रहा है।

2. केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश दुदानी के अनुसार जरूरी दवाओं के दाम पर नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइस कंट्रोल अथॉरिटी फैसला लेती है। अथॉरिटी ने 20 अगस्त से लगभग 21 प्रकार की दवाओं के दाम बढ़ा दी है।

3. चिकित्सकाें ने काेराेना काल में मरीजाें काे मल्टीविटामिन अनिवार्य रूप से प्रिस्क्राइब किया। लिहाजा मल्टीविटामिन की 2 साल में 60 फीसदी खपत बढ़ गई है। वहीं डायबिटीज राेगियाें ने बचाव के लिए एहतियातन दवा लेनी शुरू कर दीं।

डेढ़ माह में ऐसे बढ़े दवाओं के दाम

बीमारी दवा पहले अब गैस रैनटेक 23.86 33.96 गैस ओमेज 50 55 खांसी सिरप मेकबरी 99 108 खांसी का सिरप गिलिन्टस 104 115 ब्लड प्रेशर लाेसार 50 60 118 शुगर ओजाेमेट 36 40 दर्द जीराेडाेल पी 49 55 दर्द जीराेडाेल एचपी 97 107 गैस डायजिन 15 20 एंटी अलर्जिक लिवाे सिट्रीजन 70 80 शुगर ग्लायकाेमेट जीपी टू 41 155 शुगर ग्लायकाेमेट जीपी वन 96 106 मल्टीविटामिन एटूजेड 105 135 मल्टीविटामिन सुपराडीन 33 52

सर्जिकल आइटम्स की कीमत भी अब दोगुनी

  • हिक्स कंपनी का नाॅर्मल थर्मामीटर पहले 80 रुपए में मिलता था, अब 175 रुपए, मतलब 120 प्रतिशत अधिक चुकाना पड़ रहा है।
  • हिक्स कंपनी का डिजिटल थर्मामीटर पहले 155 रुपए में मिलता था, अब 270 रुपए हाे गया, यानी 75 प्रतिशत अधिक दाम बढ़ गया।
  • काेराेनाकाल से पहले डिजिटल पल्स ऑक्सीमीटर की कीमत 250-400 रुपए थी, अब 700-1000 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं।

दवा का अर्थशास्त्र...धनबाद में 2000 से अधिक छाेटी-बड़ी दुकानें, हर माह 10 कराेड़ का काराेबार

​​​​​​​धनबाद जिले में छाेटी-बड़ी दाे हजार से अधिक दवा दुकानें है। धनबाद केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसाेसिएशन की मानें ताे 400 से अधिक हाेलसेल की दुकानें हैं जबकि 1500 के आसपास रिटेल काराेबार है। जिले में प्रत्येक माह 10 कराेड़ रुपए के दवा, इंप्लांट सर्जिकल उत्पादाें का काराेबार है।

सरकारी अस्पतालाें में इलाज फ्री, लेकिन दवाओं पर हजाराें का खर्च

एसएनएमएमसीएच के ओपीडी व इनडाेर में मरीजाें के नि:शुल्क इलाज होता है, लेकिन अस्पताल के मेडिसिन सेंटर में महज 18-20 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हाे पाती हैं। अस्पताल से दवा नहीं मिलने के कारण आसपास की दवा दुकानाें पर राेज लाखाें के ब्रांडेड दवाओ का काराेबार हाेता है। मेडिकल काॅलेज व अस्पताल में जन औषधि केंद्र संचालित है, लेकिन यहां भी सभी दवा मिलती।

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