ख्वाब हुआ तारामंडल:18 साल पहले भवन का पहला तल बना फिर काम रुका, तो चालू ही नहीं हुआ

धनबाद8 महीने पहलेलेखक: विजय पाठक
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आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं विज्ञान भवन - Dainik Bhaskar
आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं विज्ञान भवन
  • एनआरईपी के ईई से भास्कर 6 दिनों तक पूछता रहा - क्यों पूरा नहीं हुआ काम, हर दिन एक ही जवाब- मुझे कुछ मालूम ही नहीं

सरकारी पैसे का दुरुपयाेग किसी तरह अफसर करते हैं, इसका अंदाजा शहरी क्षेत्र में बने सरकारी भवनाें काे देखकर लगाया जा सकता है। धनबाद के बच्चाें काे अंतरिक्ष व विज्ञान की दुनिया से अगवत कराने के लिए 18 वर्ष पूर्व आईएसएम गेट के सामने विज्ञान भवन सह तारा मंडल बनाने की याेजना बनी। विज्ञान भवन के लिए सरकार से 40 लाख रुपए आवंटित भी किया गया। भवन बनाने का काम भी शुरू हुआ, लेकिन 18 साल गुजर जाने के बाद भी भवन बनकर तैयार नहीं हुआ। विज्ञान भवन का प्रथम तल बन गया, लेकिन उसके बाद काम बंद कर दिया गया।

सरकार स्तर पर भवन बनाने का जिम्मा एनआरईपी काे दिया गया था। विज्ञान भवन ताे नहीं बना, लेकिन 40 में से 20 से 22 लाख रुपए जरूर खर्च हाे गए। विज्ञान भवन का निर्माण कार्य कब तक पूरा हाेगा, इसका काम क्याें राेका गया, एनआरईपी के अफसर इसे बताने की स्थिति में नहीं हैं। एनआरईपी के प्रभारी कार्यपालक अभियंता मनाेज कुमार से भास्कर ने तीन दिनों तक यह सवाल किया कि भवन का निर्माण बीच में क्याें बंद किया गया, किस विभाग का प्रस्ताव था, भवन बनाने का उद्देश्य क्या था, पर वे किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे पाए। बस इतना कह पाए-हाल ही में उन्होंने इस विभाग का प्रभार लिया है, इसलिए कुछ बताने की स्थिति में नहीं हैं।

विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री का था ड्रीम प्राेजेक्ट

झारखंड गठन के बाद बाबूलाल मरांडी राज्य के पहले सीएम बने थे। बाेकाराे के तत्कालीन विधायक समरेश सिंह विज्ञान एवं प्रौद्याेगिकी मंत्री बने। विज्ञान भवन उनका ड्रीम प्राेजेक्ट था। उन्हाेंने राज्य के पांच जिलाें में विज्ञान भवन बनाने की घोषणा की थी। धनबाद में आईएसएम गेट के पास इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया था। भवन अधूरा ही बन पाया और काम बंद हाे गया। अब यह भवन खटाल में तब्दील हाे चुका है और चाराें ओर जंगल-ही-जंगल है।

आईएसएम को कंसल्टेंट नहीं बनाया : राज

विधायक राज सिन्हा ने बताया कि विज्ञान भवन सह तारा मंडल का मामला विधानसभा में उठा चुके हैं। पूछा था कि इस भवन का निर्माण कार्य पूरा हाेगा या नहीं? सरकार ने इस पर जो जवाब दिया, वह निराशाजनक था। सरकार ने विज्ञान भवन के लिए आईआईटी आईएसएम काे कंसल्टेंट नियुक्त करने की बात कही थी, लेकिन आज तक इस पर अमल नहीं किया गया। विज्ञान भवन निर्माण की योजाना को ही सरकार ने ही ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

14 साल पहले बना मूक-बधिर स्कूल भवन, अब तक ताला नहीं खुला
विज्ञान भवन की तरह ही 36 लाख की लागत से मूक-बधिर बच्चाें के लिए न्यू टाउन हाॅल के पीछे एक स्कूल का निर्माण कराया गया है। भवन बनकर पूरी तरह तैयार है। मूक-बधिर बच्चाें के स्कूल का बाेर्ड भी लग चुका है, लेकिन 14 साल गुजर जाने के बाद भी इस स्कूल का ताला नहीं खुला। स्कूल भवन का निर्माण भी एनआरईपी द्वारा ही किया गया है। भवन किस विभाग के कहने पर बनाया गया, उस विभाग काे अभी तक हैंडओवर क्याें नहीं किया गया, यह अब तक स्पष्ट नहीं हाे पाया है। भवन निर्माण का काम वित्तीय वर्ष 2005-06 में शुरू हुआ था। इस भवन के बगल में ही निगम का आश्रयगृह संचालित है।

छात्रावास : झारखंड गठन से पहले बनना शुरू हुआ, अब खंडहर-सा खड़ा

एकीकृत बिहार के समय ही भूदा में अल्पसंख्यकाें के लिए छात्रावास निर्माण की याेजना तैयार की गई। 40 लाख रुपए आवंटित किए गए थे। झारखंड गठन के पूर्व निर्माण शुरू हुअा। पहला तल बन गया और दूसरे तल पर काम भी शुरू हाे गया। 25 लाख खर्च हो गए, फिर रुक गया। काम क्यों बंद हुआ, यह बताने वाला काेई नहीं है। अफसर कहते हैं कि उन्हें इस बारे में पता ही नहीं है।

दिव्यांगों की दुकानों का निर्माण क्यों रुका...बताने वाला कोई नहीं
दिव्यांगाें के लिए 15 लाख की लागत से स्टील गेट में काेयला भवन जाने वाली सड़क पर दुकानों का निर्माण शुरू हुआ था। पहला तल बन भी गया। दूसरे तल्ले पर दुकानें बनने के बाद प्लास्टर का काम बीच में ही बंद कर दिया गया। दुकान निर्माण का काम क्याें बंद किया गया, यह बताने वाला भी काेई नहीं है। अधूरी बनी दुकानें अब खंडहर में बदलने लगी हैं।

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