अब अधिकतर ट्रेनों में सिर्फ दो जनरल कोच:7 माह में 23 लाख ने की अनारक्षित टिकटपर यात्रा, फिर भी कम हो गए जनरल कोच

धनबाद2 महीने पहले
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झारखंड के तीन रेल मंडलों धनबाद, रांची व चक्रधरपुर में सबसे अधिक राजस्व देने वाला धनबाद मंडल है। पिछले दशक में धनबाद मंडल की कमाई 10 गुना बढ़ी है। कमाई 8 हजार करोड़ से बढ़कर 18 हजार करोड़ तक पहुंच गई है। हर दिन करीब 100 ट्रेनें धनबाद से खुलती और गुजरती हैं। इन ट्रेनों में सबसे अधिक सवारी जनरल कोच के होते हैं, जो अनारक्षित टिकट के साथ यात्रा करते हैं।

अनारक्षित टिकट से यात्रा करने वालों की संख्या आरक्षित टिकट के यात्रियों से भी अधिक होती है। रेलवे के आंकड़ों में मुताबिक 1 अप्रैल से 31 अक्टूबर के बीच आरक्षित की तुलना में 23 लाख से अधिक यात्रियों ने अनारक्षित टिकट के साथ यात्रा की। अनारक्षित टिकट के यात्रियों से राजस्व भी 6.67 करोड़ रुपए अधिक मिला। इसके बावजूद धनबाद की अधिकतर ट्रेनों में अनारक्षित टिकट लेकर यात्रा करने वालों की जनरल कोच कम होते जा रहे हैं। ऐसे में धीरे-धीरे आम लोगों की ट्रेनों में यात्रा मुश्किल होती जा रही है।

एलएचबी रैक के मानक से कम हुए जनरल कोच
रेलवे बोर्ड की ओर से 22 कोच के साथ चलने वाली एलएचबी रैक के लिए मानक तय किया गया है। जिसके बाद लंबी दूरी के ट्रेनों में एसी कोच की संख्या बढ़ाने के लिए स्लीपर के साथ जनरल कोच कम कर दिए गए। पहले आम तौर पर भी स्लीपर के सात और जनरल के चार कोच के साथ यात्री ट्रेनें चल रही थीं। पर एलएचबी रैक में बदलने के बाद जनरल कोच आधे कर दिए गए। अब अधिकतर ट्रेनों में सिर्फ दो जनरल कोच ही होंगे।

बोगी की फर्श, शौचालय के पास बैठ करते हैं यात्रा
धनबाद से खुलने और यहां से होकर चलने वाली ट्रेनों में अधिकतर ट्रेनों में अनारक्षित टिकट पर यात्रा करने वालों की संख्या अधिक रही है। जब जनरल कोच की संख्या चार थी तब भी यात्री बोगी की फर्श और शौचालय के निकट बैठ यात्रा करते थे। गंगा दामोदर, मौर्य, गंगा सतलज आदि ट्रेनों के जनरल कोच में पुरे साल पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। जनरल कोच घटाने के बाद की स्थित का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।

जनरल कोच बढ़ाने की सांसद कर चुके हैं मांग
मंडल संसदीय समिति के अध्यक्ष सांसद पशुपति नाथ सिंह गंगादामोदर सहित कई अन्य ट्रेनों में जनरल कोच बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। सांसद के मुताबिक आरक्षण नहीं मिलने की स्थिति में लोग जनरल क्लास में मजबूरन यात्रा करते हैं। गरीब लोगों के लिए यात्रा का सहरा भी जनरल कोच ही है। जिन ट्रेनों में भीड़ अधिक होती है उनमें जनरल कोच की संख्या बढ़ाई जाने चाहिए। ताकि राहत मिल सके।​​​​​​​

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