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सरकार ने की घोषणा:कोरोना से अनाथ हुए 52% बच्चों को नहीं मिल रहे हर माह 2000 रुपए, प्राइवेट स्कूलों में कई छात्रों की फीस माफ नहीं हुई

धनबाद8 महीने पहले
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दरवाजे पर खड़ी धनबाद की एक मां। कई माताओं ने भास्कर को ऐसी ही पीड़ा बताई। - Dainik Bhaskar
दरवाजे पर खड़ी धनबाद की एक मां। कई माताओं ने भास्कर को ऐसी ही पीड़ा बताई।

कोरोना के कारण झारखंड में 1131 बच्चे अनाथ हो गए। इनमें 106 बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों को खोया, जबकि 1012 बच्चों के माता-पिता में से किसी एक का निधन हुआ है। इनके पुनर्वास के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने कई घोषणाएं कीं। उनपर तेजी से काम भी शुरू हुआ, पर प्रशासन की फाइलों के अनुसार चार माह बाद भी स्पॉन्सरशिप योजना के अंतर्गत प्रति माह दी जाने वाली दो हजार रुपए की सहायता सिर्फ 583 अनाथ बच्चों को ही मिल रही है।

यानी 52% बच्चों को यह राशि नहीं मिल रही। जबकि भास्कर अपनी पड़ताल में ऐसे 323 अनाथ बच्चों के घर पहुंचा तो पता चला कि लगभग 37% बच्चों की निजी स्कूलों की फीस माफ नहीं हुई है। राशन कार्ड बनने में देरी से इन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है। 51% की ही विधवा पेंशन शुरू हो पाई है। रांची में सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए 181, टाटा में 82, धनबाद में 60 अनाथ बच्चों व परिजनों द्वारा दिए गए 37% आवेदन पेंडिंग पड़े हैं।

बच्चों के सपने के लिए एक मां की आस

बेबस मां क्या करे, जिसके बेटे-बेटियों की पढ़ाई छूट गई। पहले कोरोना से ससुर की मौत और इसके 15 दिनों बाद पति भी चल बसे। पति कतरास के एक निजी स्कूल में पढ़ा कर परिवार की जिम्मेवारी उठा रहे थे। बेटा भी उसी स्कूल में पढ़ता था। पर, पति की मौत के बाद तंगी से बेटे की पढ़ाई छूट गई। 12वीं में पढ़ रही बेटी पहले ही पढ़ाई छोड़ चुकी थी। हर जगह मदद की गुहार लगाई, पर किसी ने नहीं सुनी। अब चिंता है कि बेटे की पढ़ाई आैर बेटियों की शादी कैसे होगी।

1. स्पॉन्सरशिप...तीन शहरों में 65% को, पर राज्य में 48% को ही मिली
प्रशासन की फाइलों में 24 जिलों के डाटा के अनुसार 1131 अनाथ बच्चों में से 583 को स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ मिलने लगा है। जबकि भास्कर पड़ताल में रांची के 181 अनाथ बच्चों में 107, टाटा के 82 अनाथ बच्चों में 76 व धनबाद में हम जिन 60 अनाथ बच्चों तक पहुंचे, उनमें 29 बच्चों को ही इस योजना के तहत 2000 रु. मिल रहे हैं। यानी तीन बड़े शहरों में 65% बच्चों को, जबकि पूरे राज्य में 48% को ही स्पॉन्सरशिप मिल रही है।

2. विधवा पेंशन...49% को ही मिली, नहीं बन रहा पीडि़तों का राशन कार्ड
सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें हो रही है जिन्होंने पिता खोया है। 50% माताओं की विधवा पेंशन शुरू हो पाई है। हमारी पड़ताल के अनुसार टाटा में 45, रांची में 83 व धनबाद में 32 माताओं की विधवा पेंशन चालू हुई है। जबकि धनबाद में हम जिन 60 घरों तक पहुंचे उनमें 20 का राशन कार्ड नहीं बना है। टाटा में 42 का बना है, पर 8 आवेदन लंबित हैं। रांची में ज्यादा के पास राशन कार्ड थे, इसलिए 10 के बनाए गए हैं।

3. स्कूल फीस... रांची में प्रक्रियाओं में अटकी है 74 बच्चों की फीस

1131 अनाथ बच्चों में से 972 स्कूल जाते हैं। इनमें 530 सरकारी और 442 बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। सरकार ने सभी उपायुक्तों को आदेश दिया है कि वह इनकी फीस माफ कराएं। रांची में निजी स्कूलों के 74 बच्चों की फीस अभी तक माफ नहीं हुई है। धनबाद में 22 व टाटा में 76 बच्चों की फीस माफ हो चुकी है।

4. पीएम आवास...जिनकी रैयती जमीन नहीं, उनके आवेदन पेंडिंग

जिन्होंने पीएम आवास का आवेदन दिया है, उनमें कई का मामला रैयती जमीन होने व नहीं होने में फंसा हुआ है। जमशेदपुर में ऐसे 16 आवेदन आए हैं, जिनमें चार की अपनी जमीन नहीं है। उन्हें बिरसा नगर पीएम आवास योजना का लाभ देने की प्रक्रिया जारी है, पर आवेदन अभी भी लंबित हैं।

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