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सिटी बसाें की खरीदारी:10 साल पहले खरीदी गईं 58 सिटी बसें बेकार खड़ी हैं, अब फिर से 225 नई बसें खरीदने की तैयारी

धनबादएक महीने पहले
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बरटांड़ का स्टैंड बना है सिटी बसों का कब्रिस्तान - Dainik Bhaskar
बरटांड़ का स्टैंड बना है सिटी बसों का कब्रिस्तान
  • सूडा निदेशक ने धनबाद और चिरकुंडा नगर निकायाें काे एक्शन प्लान तैयार करने का दिया निर्देश
  • अधिकारियाें के साथ की बैठक, प्राक्कलन व रूट चार्ट बनाने काे कहा

धनबाद में 225 सिटी बसाें की खरीदारी की जाएगी। वह भी तब, जब यहां 10 साल पहले खरीदी गईं 70 में से मजह 12 बसें ही चल रही हैं। 58 सिटी बसें खड़ी-खड़ी बेकार हाे गईं। उनकी मरम्मत कराने और फिर से सड़काें पर उतारने की काेशिश तक नहीं की गई। इसके बावजूद नगर विकास विभाग ने बड़ी संख्या में नई बसाें की खरीदारी का फैसला किया है।

इन बसाें काे धनबाद नगर निगम और चिरकुंडा नगर परिषद क्षेत्राें में चलाया जाएगा। धनबाद दाैरे पर आए शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के निदेशक अमित कुमार ने दाेनाें नगर निकायाें के अधिकारियाें के साथ बैठक भी की है। उन्हें सिटी बस सेवा के लिए प्राक्क्लन, रूट चार्ट तैयार कर कंपलीट एक्शन प्लान तैयार करने काे कहा है। डीपीआर नगर विकास विभाग भेजने का निर्देश दिया गया है।

1. नगर निकाय करेगा किराए का निर्धारण और बसों की माॅनिटरिंग

सूडा निदेशक अमित कुमार का कहना है कि धनबाद और चिरकुंडा में पहले फेज में करीब 225 बसें आएंगी। बाद में इतनी ही बसें और आ सकती हैं। बसाें का परिचालन ग्राॅस काॅस्ट काॅन्ट्रेक्ट माॅडल (जीसीसी) पर किया जाएगा। संचालन का जिम्मा निजी एजेंसियाें काे साैंपा जाएगा। किराए का निर्धारण और माॅनिटरिंग नगर निकाय करेगा।

2. हर 5-7 मिनट पर खुलेंगी बसें, तय किए जाएंगे रूट व स्टाॅपेज

​​​​​​​तीन कैटेगरी की बसें चलाने की याेजना है। चाैड़ी सड़काें पर बड़ी और मध्यम श्रेणी की बसें चलेंगी। वहीं, कम चाैड़ी सड़काें पर मिनी बसाें काे चलाया जाएगा। धनबाद से झरिया-सिंदरी, कतरास, ताेपचांची, चिरकुंडा के रूटाें में संचालन के लिए चार्ट और स्टाॅपेज तय किए जाएंगे। हर 5-7 मिनट पर एक बस खुलेगी।

पूर्व सैनिक, पर्यटन विभाग, एनजीओ बसाें के संचालन में रहे नाकाम

साल 2010 में स्वराज माज्दा कंपनी की 35 मिनी बसें धनबाद काे मिलीं। साल 2012 में 35 और सिटी बसें आईं। संचालन का जिम्मा पूर्व सैनिकाें के संगठन काे दिया गया। उन्हाेंने दाे-ढाई साल तक बसें चलाईं। 7-8 महीने खड़ी रहनेके बाद 2014 में पर्यटन विभाग काे बसें साैंपी गईं। कुछ दिनों बाद एनजीओ काे संचालन का जिम्मा दिया गया, पर वे भी नाकाम रहे। 2016 में किसी तरह 12 बसें चलनी शुरू हुईं।

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