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स्वास्थ्य संसाधनों की पड़ताल:धनबाद के 5 कोविड अस्पतालों में 78 डॉक्टरों की जरूरत, 38 ही उपलब्ध; 115 नर्सिंग स्टाफ भी कम

धनबाद12 दिन पहले
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  • सिर्फ निर्माण में ही रही रुचि, ठेकेदार-अफसरों के खेल में बनते चले गए भवन

धनबाद के एसएनएमीएच स्थित कैथलैब, पीजी बिल्डिंग, सेंट्रल हॉस्पिटल, भूली कोविड सेंटर और निरसा पॉलिटेक्निक स्थित मेडिकल फैसिलिटी में 78 डॉक्टरों की जरूरत है, जबकि यहां 38 डॉक्टर ही सेवा दे रहे हैं। 40 और डॉक्टर के साथ 115 अतिरिक्त नर्सिंग स्टाफ की भी जरूरत है। जिले में 646 नए बेड तैयार किए गए हैं। अभी किसी तरह इन कोविड अस्पतालों में काम चल रहा है। 12 से 14 घंटे तक काम लिया जा रहा है। कुछ डॉक्टरों को डीएफएमटी फंड से नियुक्त किया गया है। वहीं करीब 15 प्राइवेट डॉक्टरों की भी सेवा ली जा रही है।

पारा मेडिकल व नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध कराने का जिम्मा आउटसोर्सिंग एजेंसी के जिम्मे है, जो कमी को पूरा नहीं कर पा रही है। कई बार मरीज के परिजन इस बात को लेकर हंगामा किया कि उनके मरीज का इलाज ठीक से नहीं हुआ। डॉक्टर ने नहीं देखा। इधर, झारखंड में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर अफसरों ने 10 साल में 1897 करोड़ खर्च कर 629 अस्पताल बनवा दिए, पर डॉक्टरों-नर्सों की नियुक्ति के बिना ये कभी खुले ही नहीं। अब खंडहर बन गए हैं। इनमें 75 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 2 अनुमंडलीय अस्पताल, 158 पीएचसी और 394 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) शामिल हैं। अस्पताल चलाने के लिए डॉक्टर और पारा मेडिकलकर्मी कहां से आएंगे, इसकी योजना नहीं बनाई।

जानिए... क्यों नहीं हुए डॉक्टर और नर्सें नियुक्त

पिछले दिसंबर में लगभग तीन साल बाद झारखंड में जेपीएससी से डॉक्टरों की नियुक्ति हुई। इससे पहले भी कई बार नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया, पर कम ही डॉक्टरों ने आवेदन दिया। जो नियुक्त हुए, उनमें भी कई छोड़कर चले गए। नर्सों की नियुक्ति का मामला स्थानीय नीति में फंसा रहा। वहीं, ठेकेदारों ने कई बिल्डिंगें हैंडओवर नहीं कीं। सरकारें इन सब पर गंभीरता दिखातीं तो आज यह नौबत नहीं आती।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार 1000 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए, झारखंड में 11 हजार पर हैं एक, स्थिति सुधरने में लग जाएंगेे 87 साल

203 पीएचसी में से 140 में सिर्फ एक डॉक्टर, 100 में टेक्नीशियन ही नहीं

140 पीएचसी में सिर्फ एक ही डॉक्टर हैं। कोई ऐसा पीएचसी नहीं है जहां चार या इससे अधिक डॉक्टर हैं। तीन डॉक्टरों वाले 14, दो डॉक्टरों वाले 42 पीएचसी हैं। सात पीएचसी में डॉक्टर नहीं हैं। 100 पीएचसी बिना लैब तकनीशियन, 117 बिना फार्मासिस्ट, 55 बिना महिला डॉक्टर के चल रहे हैं। आज स्थिति यह है कि नियमानुसार छह बेड की जगह 10 बेड एक नर्स संभाल रही हैं।

डॉक्टरों की कमी के कारण राज्य में बंद पड़े हैं 3 नए मेडिकल कॉलेज

डब्ल्यूएचओ के अनुसार प्रति हजार मरीजों पर एक डॉक्टर चाहिए। यहां 11 हजार पर एक डॉक्टर हैं। राज्य की 3.25 करोड़ आबादी के अनुसार 32500 डॉक्टर होने चाहिए, जबकि 10 हजार हैं। 22500 डॉक्टरों की कमी पूरी करने में 87 साल लगेंगेे। वहीं 3 नए मेडिकल काॅलेज- दुमका, हजारीबाग, पलामू बंद पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आज रांची में ही तत्काल 50 डॉक्टरों और नर्सों की जरूरत है।

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