मुथूट डाकाकांड:बैंक मोड़ थानेदार ने जान-बूझकर बेटे को मार डाला, फिर कहा- एनकाउंटर में मरा

धनबाद24 दिन पहले
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बैंक मोड़ थाना क्षेत्र में मुथूट फिनकॉर्प डाकाकांड के दौरान पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भूली के शुभम सिंह की मां शशि सिंह ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की है, - Dainik Bhaskar
बैंक मोड़ थाना क्षेत्र में मुथूट फिनकॉर्प डाकाकांड के दौरान पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भूली के शुभम सिंह की मां शशि सिंह ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की है,

बैंक मोड़ थाना क्षेत्र में मुथूट फिनकॉर्प डाकाकांड के दौरान पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भूली के शुभम सिंह की मां शशि सिंह ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की है, जिसमें बैंक मोड़ थानेदार प्रमोद कुमार सिंह पर फर्जी मुठभेड़ में जान-बूझकर एके-47 से बेटे को मार डालने का आरोप लगाया है। याचिका में झारखंड के गृह सचिव, डीजीपी, धनबाद के एसएसपी व बैंक मोड़ थानेदार को विपक्षी बनाया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मो. जावेद ने बताया कि 7 सितंबर को मुथूट में डकैती के प्रयास की घटना में मारे गए आरोपी शुभम की मां ने रिट याचिका में दावा किया कि बैंक मोड़ थानेदार ने जान-बूझकर एके-47 रायफल से उसके बेटे के शरीर के विभिन्न भागों में गोली मार दी।

पुलिस ने इसे एनकाउंटर बताया, जबकि यह फर्जी मुठभेड़ थी। बैंक मोड़ थानेदार ने अपने सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर घटनास्थल पर ही किसी व्यक्ति को दोषी करार देकर सजा भी दे दी। उन्हें पुरस्कृत भी किया गया।

बैंक मोड़ में दर्ज किया गया केस, लेकिन आईओ सरायढेला थानेदार बनाए गए

याचिका में शशि सिंह ने बताया कि बैंक मोड़ थानेदार डॉ प्रमोद कुमार सिंह ने बैंक मोड़ थाने में ही प्राथमिकी दर्ज की, लेकिन अनुसंधान का भार सरायढेला थाना प्रभारी को दिया गया। पुलिस तथा वरीय पुलिस अधिकारियों के इस रवैया से यह प्रतीत होता है कि अधीनस्थ पुलिस अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकते और पुलिस इस मामले में साक्ष्य को मिटाने का प्रयास कर रही है। किसी स्वतंत्र एजेंसी से मामले की जांच होनी चाहिए।

याचिका में पूछा गया - पुलिस को सजा देने का अधिकार कैसे मिला?

रिट याचिका में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एनकाउंटर को लेकर दिए गए दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया कि पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। मृतक शुभम पढ़ा-लिखा युवक था। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। यदि वह रास्ते से भटक भी गया था तो उसे मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जाना चाहिए था। पुलिस को न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है। इसलिए उसने घटनास्थल पर ही सजा का ऐलान कर दिया और एक व्यक्ति को मार डाला।

झरिया में सस्पेंड, फिर बन गए थानेदार

रिट याचिका में बैंक मोड़ थाना प्रभारी के के क्रियाकलापों का भी उल्लेख है। कहा गया कि प्रमोद कुमार सिंह झरिया थाने में थानेदार थे। ऐना कोलियरी में बेवजह लाठीचार्ज पर निलंबित किए गए थे। बाद में उन्हें बैंक मोड़ थाना का प्रभारी बनाया गया। यहां भी तानाशाह जैसे काम किया।

मृतक शुभम समेत सात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था केस

बैंक मोड़ थानेदार प्रमोद कुमार सिंह की लिखित शिकायत पर मो. आसिफ उर्फ निर्मल सिंह पवार (चकनौर, समस्तीपुर), राघव उर्फ राहुल (बड़हैया, लखीसराय), रैबिट उर्फ शुभम (कोइलवर आरा), टोकियो उर्फ छोटू (समस्तीपुर), शंकर ठाकुर उर्फ रमेश ठाकुर (कल्याणपुर, समस्तीपुर), रवि उर्फ रवि रंजन सिंह (शेखो, समस्तीपुर), अन्नू सिंह उर्फ राजीव सिंह उर्फ पिल्लू (समस्तीपुर) पर केस दर्ज किया गया था। आसिफ तथा राहुल जेल भेज दिया गया था।

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