बस्ताकोल कंपनी के रेस्क्यू हेड क्वार्टर में होगी प्रतियोगिता:खान सुरक्षा प्रतियोगिता-2024 की मेजबानी का जिम्मा बीसीसीएल को

धनबाद2 महीने पहलेलेखक: संजय मिश्रा
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साल 2024 में आयोजित हाेने वाले अखिल भारतीय खान सुरक्षा एवं बचाव प्रतियोगिता का बीसीसीएल मेजबानी करेगी। पांच दिनाें तक चलने वाले प्रतियोगिता का आयोजन बस्ताकाेल स्थित कंपनी के रेस्क्यू हेड क्वार्टर में हाेगा। प्रतियोगिता के आयोजन काे लेकर बीसीसीएल ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसकी जानकारी देते हुए सीएमडी समीरन दत्ता का कहना है कि आयोजन की जिम्मेवारी मिलने से कंपनी प्रबंधन अपने आप काे गाैरवान्वित महसूस कर रहा है। प्रतियोगिता में काेल इंडिया की अनुषंगी कंपनियां, सिंगरैनी, टाटा टिस्काे के अलावा देश की विभिन्न मेटल माइंस की कपनियां भाग लेंगी।

राजस्थान में 14 से 18 नवंबर तक आयोजित 51वें के समापन में डीजीएमएस की ओर से गठित सुपर ग्रुप की कमेटी ने 2024 में आयोजित हाेने वाले प्रतियोगिता की जिम्मेवारी बीसीसीएल काे साैंपी। प्रतियोगिता का आयोजन डीजीएमएस की निगरानी में की जाती है। विभिन्न श्रेणियाें में आयोजित हाेने वाले प्रतियोगिताओ में शामिल हाेने के लिए कंपनियाें से प्रविष्टियां आमंत्रित की जाती है। प्रतियोगिता में अधिक से अधिक श्रेणियाें में पुरस्कार प्राप्त करने का प्रयास हाेगा।

खान सुरक्षा काे लेकर सुरक्षा में उपयोग हाेने वाले अत्याधुनिक मशीनाें की खरीदारी की जाएगी। प्रतियोगिता के दाैरान अंडर ग्राउंड एवं ओपेन कास्ट माइंस में विभिन्न कंपनियाें द्वारा अपनाए जा रहे सुरक्षा के अत्याधुनिक उपायाें काे एक-दूसरे काे जाने का माैका मिलता है।

प्रतियोगिता में बीसीसीएल ने प्राप्त किए थे 4 पुरस्कार
हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की ओर से राजस्थान के उदयपुर में 14 से 18 नवंबर तक आयोजित प्रतियोगिता में बीसीसीएल काे कुल चार पुरस्कार प्राप्त हुए थे। टीम बीसीसीएल को थ्योरी में द्वितीय पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ कप्तान तथा वैधानिक परीक्षण श्रेणी में तीसरा पुरस्कार प्राप्त किया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाली कुल 20 टीमों में बीसीसीएल ओवरऑल छठे स्थान पर रही।

माइन रेस्क्यू किसी भी माइनिंग ऑपरेशन का एक महत्वपूर्ण और सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। माइन रेस्क्यू टीमों की तैयारी के स्तर से किसी भी बचाव और रिकवरी ऑपरेशन की सफलता का निर्धारण किया जा सकता है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाली कंपनियों के लिए सीखने का एक बड़ा स्रोत बन जाएगा और खान सुरक्षा के लिए नए रास्ते उपलब्ध कराएगा।

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