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एक नई शुरुआत:दीक्षांत का मतलब शिक्षा का अंत नहीं, नया आरंभ होता है

धनबाद2 महीने पहले
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  • बीबीएमकेयू के पहले दीक्षांत समारोह में दो सत्रों के 51 टॉपरों को सौंपे गए गोल्ड मेडल, 60307 को मिलीं उपाधियां

दीक्षांत का मतलब शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अब जरूरी है कि क्लासरूम में अर्जित ज्ञान का इस्तेमाल समाज की बेहतरी के लिए किया जाए। शिक्षण संस्थानों की भी यह जिम्मेवारी होनी चाहिए कि वहां से निकलनेवाले विद्यार्थी चरित्रवान और नैतिक रूप से बेहतर नागरिक बन सकें। ये बातें झारखंड के राज्यपाल और कुलाधिपति रमेश बैस ने गुरुवार को बिनाेद बिहारी महताे कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) के पहले दीक्षांत समारोह के मौके पर कहीं।

उनका अभिभाषण रांची स्थित राजभवन में रिकॉ‌र्ड किया गया था, जिसे धनबाद के सिंफर ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह के दौरान प्रसारित किया गया। वहीं, सीएम हेमंत सोरेन रांची के प्रोजेक्ट भवन से ऑनलाइन समारोह से जुड़े। उन्होंने भेलाटांड़ में विवि के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया।

दीक्षांत समारोह में स्नातक सत्र 2016-19 और 2017-20 तथा स्नातकोत्तर सत्र 2017-19 और 2018-20 के साथ-साथ बीएड, एलएलबी, एमबीबीएस के टॉपरों को कुलपति डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने गोल्ड मेडल साैंपे। 51 विद्यार्थियों का चयन गोल्ड मेडल के लिए किया गया था, लेकिन समारोह में 46 ही पहुंचे। समारोह में सांसद पीएन सिंह, विधायक राज सिन्हा, सामाजिक विज्ञान फैकल्टी की डीन डॉ. रंजना श्रीवास्तव, मानविकी की डीन डॉ. सीमा सिन्हा आदि मौजूद थे।

अमीन के हजारों पद खाली, विवि कोर्स कराए : सीएम

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बतौर विशिष्ट अतिथि कहा कि कोरोना की वजह से संस्थान बंद हैं और ऑनलाइन पढ़ाई करना राज्य के सभी विद्यार्थियाें, खासकर गरीब परिवार के बच्चों के लिए आसान नहीं है। ऐसे में शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाना चुनौती है। उन्होंने कहा कि झारखंड में अमीन के हजारों पद खाली हैं। समीक्षा के दौरान पता चला कि राज्य में इसकी पढ़ाई की समुचित व्यवस्था ही नहीं है। उन्होंने बीबीएमकेयू के कुलपति से आग्रह किया कि वे संस्थान के तहत अमीन के कोर्स शुरू करें, ताकि युवाओं को नौकरी मिल सके। पढ़ें पेज 4 भी

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