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नवरात्री पूजा:स्कंदमाता की आराधना में लीन रहे श्रद्धालु, आज मां कात्यायनी की हाेगी आराधना

धनबादएक महीने पहले
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शारदीय नवरात्र काे लेकर श्रद्धालुओं का उत्साह दखते ही बन रहा है। नवरात्र में मंदिराें से लेकर घराें में देवी दुर्गा की अराधना जारी है। बुधवार काे माता रानी के पांचवें स्वरूप माता स्कंदमाता की भक्ताें ने विधि-विधान से पूजा की। स्कंदमाता भक्तों को सुख-शांति प्रदान करने वाली हैं।

देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। शिव और पार्वती के दूसरे और षडानन (छह मुख वाले) पुत्र कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है, क्योंकि यह सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसलिए इनके चारों ओर सूर्य जैसा अालौकिक तेजोमय मंडल दिखाई देता है। स्कंदमाता की उपासना से भगवान स्कंद के बाल रूप की भी पूजा होती है।
कात्यायनी की पूजा से रोग, शोक से मिलती है मुक्ति
नवरात्रि के दिन छठवें दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। ये दुर्गा मां का छठवां अवतार है। शास्त्रों में कहा गया है कि मां कात्यायनी, कात्यायन ऋषि की पुत्री थीं। इस वजह से इनका नाम कात्यायनी पड़ गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अगर मां कात्यायनी की पूजा की जाए तो विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। यही नहीं, व्यक्ति रोग, शोक, संताप और भय से भी मुक्ति पाता है।

ढोली तारों ढोल बाजे, गरबा गीत पर नाचीं महिलाएं

ढोली तारो ढोल बाजे, ढोल बाजे रे, एवो वगाड़ के गरबा मां धूम मची जाए, आदि गरबा गीतों पर महिलाओं और बच्चाें ने जमकर नृत्य किया। अपने-अपने घराें पर रहकर गुजराती समाज के लाेग वर्चुअल गरबा में शामिल हाेकर जमकर मस्ती की। गरबा की धुन पर महिलाएं, बच्चे अपने आप को नाचने से राेक नहीं सके। काेविड-19 में इस साल सामूहिक रास गरबा के आयाेजन पर राेक है। हालांकि, गुजराती समाज से जुड़े संगठन परंपरा काे कायम रखने के लिए वर्चुअल गरबा का आयाेजन किया है।

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