अंधेरे में टीबी वार्ड:टीबी के मरीजाें के मामले में धनबाद राज्य में पांचवें नंबर पर, लेकिन यहां उन्हें भर्ती करने की सुविधा ही नहीं

धनबाद2 महीने पहले
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शाम ढल जाने के बाद वार्ड बंद और गेट पर लटका है ताला। - Dainik Bhaskar
शाम ढल जाने के बाद वार्ड बंद और गेट पर लटका है ताला।

धनबाद में टीबी तेजी से फैल रहा है। झारखंड में रांची, जमशेदपुर, बाेकाराे, देवघर के बाद टीबी के सबसे अधिक मरीज धनबाद में ही हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में एक्टिव केस 2756 हैं। इसके बावजूद यहां टीबी के मरीजों के इलाज का पुख्ता इंतजाम नहीं है। सदर अस्पताल में एक टीबी वार्ड है, जिसमें गंभीर मरीजाें काे इसमें भर्ती कर इलाज करने का प्रावधान है, लेकिन यहां न बिजली की सुविधा है और न ही पानी की। इस वजह से दसियाें मरीज राेज इस वार्ड में भर्ती हाेते हैं, उन्हें दवाएं दी जाती हैं और फिर शाम ढलने के पहले ही डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

वे घर लाैट जाते हैं और अगली सुबह फिर आकर भर्ती हाे जाते हैं। असल में, कुछ माह पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने इस वार्ड काे शहीद निर्मल महताे मेडिकल काॅलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) में बर्न यूनिट के लिए बने वार्ड में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया था। मेडिकल काॅलेज प्रबंधन ने इसकी अनुमति दे दी, पर शिफ्टिंग नहीं हुई। इस बीच वार्ड की बिजली-पानी की सप्लाई काट दी गई। इसी वजह से मरीजाें काे भर्ती करना संभव नहीं है। वार्ड के कर्मी बताते हैं कि मरीजाें काे दवा देने के बाद कुछ घंटाें तक वहां रखा जाता है और अंधेरा हाेने से पहले डिस्चार्ज कर दिया जाता है। हालांकि, जिनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ जाती है, उन्हें मेडिकल काॅलेज अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी नहीं है टीबी वार्ड

टीबी से पीड़ित गंभीर रूप से बीमार मरीजाें काे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा जाता है, लेकिन वहां भी अलग से टीबी वार्ड नहीं है। ऐसे में मरीजाें काे मेडिसीन विभाग के मेल या फीमेल वार्ड में ही भर्ती कर दिया जाता है। संक्रामक राेग हाेने की वजह से इसके दूसरे राेगियाें में भी फैलने की आशंका हाेती है, लेकिन मेडिकल काॅलेज अस्पताल में इसका ध्यान ही नहीं रखा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, जिले में चिह्नित टीबी मरीजाें काे नियमित दवा देने का प्रावधान है। जाे अस्पताल नहीं आते, उन्हें डीबीटी के जरिए हर महीने दवा के लिए 500 रुपए भेजे जाते हैं।

इन 10 जिलाें में टीबी के सबसे ज्यादा केस

जिला मरीज जमशेदपुर 7256 रांची 6864 बाेकाराे 2788 दुमका 2787 धनबाद 2756 गिरिडीह 2620 साहिबगंज 2528 देवघर 2268 सरायकेला 1831 गढ़वा 172

टीबी उन्मूलन में धनबाद राज्य में फिसड्‌डी

संक्रामक बीमारी टीबी के उन्मूलन के लिए देशभर में अभियान चलाया जा रहा है। साल 2025 तक इस बीमारी काे खत्म करने का लक्ष्य है। धनबाद में भी अभियान चलाकर मरीजाें काे ढूंढ़ा जा रहा है, लेकिन यहां उनके इलाज के लिए 10 वार्ड का वार्ड तक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब एक माह पहले जारी की गई एक रिपाेर्ट के मुताबिक, धनबाद में टीबी उन्मूलन अभियान की स्थिति बेहद खराब है। झारखंड के 24 जिलाें में धनबाद सबसे आखिरी पायदान पर है, जबकि सबसे ज्यादा एक्टिव केस वाला जमशेदपुर पहले नंबर पर है।

टीबी वार्ड की बिजली क्याें काटी गई या कट गई, इसकी जानकारी नाेडल पदाधिकारी से मांगी गई है। रिपाेर्ट मिलने के बाद बिजली-पानी समेत राेगियाें के लिए सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं वार्ड में उपलब्ध कराई जाएंगी।’’
- डाॅ एसके कांत, सिविल सर्जन, धनबाद

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