माह की राहतभरी शुरुआत:दशहरा-दिवाली...सुरक्षित गुजरे, संक्रमित मिले सिर्फ 37, कोई मौत नहीं, अभी एक्टिव केस 2

धनबाद23 दिन पहलेलेखक: जीतेंद्र कुमार
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काेराेनाकाल में डेढ़ साल यानी पिछले 18 महीनाें के बाद इस वर्ष अक्टूबर सबसे रात भरा महीना रहा। अक्टूबर के 31 दिन में धनबाद में केवल 29 संक्रमित की पहचान हुई जबकि इस दौरान 27 मरीज स्वस्थ हाेकर काेविड अस्पताल से डिस्चार्ज भी हुए। इस दौरान किसी संक्रमित की मौत नहीं हुई।

वहीं नवंबर माह की भी राहतभरी शुरुआत हो चुकी है। इस माह 6 तारीख तक सिर्फ 1 पॉजिटिव मिला, जबकि दो डिस्चार्ज हुए। अब छठ सामने है। डॉक्टर बड़े कोरोना विस्फोट की आशंका को नकार रहे हैं। उनका कहना है कि दशहरा-दिवाली में भारी भीड़ उमड़ने के बावजूद आशंकाएं निर्मूल साबित हुईं। एेसे में सावधानी बरती गई तो छठ भी राहतभरी परिणाम देकर जाएगी।

आईडीएसपी की रिपाेर्ट के अनुसार इस साल अक्टूबर और नवंबर में अब तक मिले में मिले 95 फीसदी संक्रमिताें की पहचान दूसरे राज्याें से आने वाले यात्रियाें के रूप में हुई। इनमें 18 संक्रमित दक्षिण भारत व 2 दिल्ली की ट्रेनाें से धनबाद लाैटे थे, जबकि 7 यात्री बंगाल से आए थे। वहीं पिछले वर्ष अक्टूबर में जिले में काेराेना वायरस से 1191 संक्रमित मरीजों की पहचान हुई थी। इस महीने 21 संक्रमित मरीज की माैत हुई थी।

केस नहीं बढ़ने का टीकाकरण सबसे बड़ी वजह बना, अब तक 16.65 लाख डोज लगे
संक्रमण की दर कम हुई है, जबकि वैक्सिनेशन की रफ्तार तेज है। धनबाद में केस नहीं बढ़ने की सबसे बड़ी वजह तेजी से वैक्सीनेशन को बताया जा रहा है। फिलहाल धनबाद में 75 प्रतिशत लाेगाें काे वैक्सीन का डाेज लगाया जा चुका है। जिले में लगभग 21 लाख लाेगाें काे वैक्सीन लगाने का लक्ष्य है। धनबाद में अब तक 16 लाख 65 हजार 9 सौ 39 लोगों को डोज लग चुका है। इनमें 12 लाख 3 सौ 78 लोगों को फर्स्ट और 4 लाख 62 हजार 1 सौ 61 लोगों को दोनों डोज लग चुके हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट : केस बढ़ने की आशंका कम, फिर भी सावधानी जरूरी : डाॅ यूके ओझा
जिले में काेविड के क्लिनिकल नाेडल अधिकारी डाॅ यूके ओझा का कहना है कि सितंबर-अक्टूबर में संक्रमण के बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी, पर संक्रमण दर काफी कम रही। दशहरा-दिवाली गुजर गए। इसके बावजूद संक्रमण बढ़ने के मामले नहीं मिले हैं। संक्रमण की पहली और दूसरी लहर के बीच तीन माह का अंतर रहा था। दूसरी और तीसरी लहर के बीच तीन माह का वक्त भी गुजर गया है। दिवाली पर भी जिस ढंग से बाजारों में भीड़-भाड़ रही, इससे संक्रमण के तेजी से फैलने की आशंका थी। परंतु अब भी सावधानी बेहद जरूरी है।

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