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प्रस्ताव:डीडब्ल्यूएसडी ने भेलाटांड़ में जमीन देने से किया इनकार, 589 करोड़ की जलापूर्ति योजना फंसी

धनबाद8 महीने पहले
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  • भेलाटांड़ में अतिरिक्त वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए निगम दे चुका है टेंडर, पाइपलाइन भी बिछ रही
  • भेलाटांड़ नहीं, सिंदरी में दे सकते हैं जमीन मेयर ने जताया विरोध

589 कराेड़ की जलापूर्ति याेजना में पेंच फंस गया है। भेलाटांड़ में एक अतिरिक्त वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना है, जिसका टेंडर एल एंड टी नामक कंपनी को मिल चुका है। अब पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडब्ल्यूएसडी) ने भेलाटांड़ में ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया है। विभाग ने भेलाटांड़ के बजाय अब सिंदरी में ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव भी दिया है। इसी प्रस्ताव ने याेजना में अड़चन पैदा कर दी है। मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने इस प्रस्ताव का विराेध किया है। उनका कहना है कि शहर के लाेगाें काे पेयजल संकट से मुक्ति दिलाने के लिए 10 एमएलडी क्षमता वाला नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनना है। यह प्लांट अब सिंदरी में बनने से धनबाद शहर के लाेगाें काे काेई लाभ नहीं हाेगा, उल्टे याेजना की लागत 100 से 200 कराेड़ और बढ़ जाएगी। मेयर के विराेध और विभाग के प्रस्ताव के बाद अब यह मामला और उलझ गया है। अब इसका निपटारा सचिवाें की संयुक्त बैठक में ही हाेने की उम्मीद है।
क्या है ट्रीटमेंट प्लांट का पेंच...

589 कराेड़ की जलापूर्ति याेजना के तहत मैथन से भेलाटांड़ तक समानांतर पाइप लाइन बिछाने का काम हाेना है। पाइप बिछाने का काम भी शुरू हाे गया है। पाइप बिछाने के साथ भेलाटांड़ में एक ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाना है, जिसके लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग जमीन देने काे तैयार नहीं है। छह माह से यह मामला इसी तरह से लटका हुआ है।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के विस्तार के लिए रखी जमीन, नहीं दे सकता
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अफसराें की माने ताे जिस जमीन काे निगम नए प्लांट के लिए मांग रहा है, उस जमीन काे मौजूदा प्लांट के विस्तार के लिए रखा गया है। विभाग की और से वहां 35 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव है। इसी कारण सिंदरी का प्रस्ताव दिया गया है। इधर इस मामले की जानकारी हाेने के बाद मेयर ने जुडकाे के अधिकारियाें से बात की और उन्हें बताया कि अगर 10 एमएलडी में परेशानी है ताे उसे 35 एमएलडी कर दिया जाए। डीपीअार में बदलाव कर इसे किया जा सकता है। उन्हाेंने विभागीय स्तर पर बैठक बुलाने की भी बात कहीं है।
जमीन के पेंच से शहर के लोगों को नहीं होगा लाभ 
भेलाटांड़ के बजाय सिंदरी में ट्रीटमेंट प्लांट बनने से शहर के लाेगाें काे लाभ नहीं हाेगा। अभी मैथन से 70 एमएलडी पानी आता है, लेकिन भेलाटांड़ मात्र 30 एमएलडी पानी ही पहुंच पा रहा है। इस कमी काे दूर करने के लिए ही इस याेजना काे लाया गया है, लेकिन अब जमीन का पेंच फंस रहा है। चंद्रशेखर अग्रवाल, मेयर
पैसे देकर जमीन खरीदी, मुख्यालय को अधिकार
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने भेलाटांड़ में पैसे देकर जमीन की खरीदारी की है। निगम काे जमीन देने का अधिकार मुख्यालय काे ही है। जमीन हस्तांतरण काे लेकर बैठक हाेने वाली थी, लेकिन लाॅकडाउन के कारण नहीं हाे सकी। अगले सप्ताह बैठक हाेने की उम्मीद है। आरएन शर्मा, अधीक्षण अभियंता, डीडब्ल्यूएसडी

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