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स्वस्थ जीवन:तेजी से बढ़ रहे बीपी व शुगर के मरीज, धनबाद में 30 वर्ष से अधिक उम्र वाले 1 लाख लोगों का होगा सर्वे

धनबाद14 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • जिले में नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी सेल) की ओर से एक लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच कराई जानी है

जिसके पास स्वस्थ शरीर है, उस पर मानसिक तनाव भी अपना प्रभाव छोड़ पाने में असमर्थ होता है। एक कहावत है कि पहला सुख निरोगी काया। यानी जीवन का पहला और सबसे बड़ा सुख अगर कोई है तो वह केवल स्वस्थ जीवन है। स्वस्थ जीवन का तात्पर्य केवल इतना भर नहीं है कि अच्छा आहार लिया जाए, बल्कि इसमें अन्य बातें भी समाहित हैं।

जैसे व्यक्ति का आचार विचार कैसा है, व्यक्ति का आसपास का वातावरण कैसा है। जो व्यक्ति देखने में अच्छा हो, जरूरी नहीं कि वह पूर्ण स्वस्थ ही हो। वर्तमान में कुछ बीमारी ऐसी भी हैं, जो ऊपर से नहीं दिखती, लेकिन मनुष्य के शरीर को अंदर ही अंदर प्रभावित करती हैं। बीमारियों की जड़ केवल लापरवाही ही है।

मुख्यालय के निर्देश पर होगा सामुदायिक सर्वे

जिले में नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी सेल) की ओर से एक लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच कराई जानी है। सर्वे में 30 वर्ष से अधिक आयु के लाेगाें काे शामिल किया जाएगा। बताते चलें कि धनबाद में लॉकडाउन से पहले सामुदायिक सर्वे शुरू किया गया था। लेकिन संक्रमण के कारण सर्वे शुरुआत में ही रोक दी गई। अब मुख्यालय के निर्देश पर फिर से सर्वे शुरू कराया जा रहा है।

बीमारी की पहले ही पहचान कर लेने की योजना

भारत में तेजी से ब्लड प्रेशर व शुगर के मरीज बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीमारी होने से पहले प्री डायग्नोस्टिक करने व बीमारी को पहले ही काबू करने की योजना बनाई है। इसे देखते हुए 30 वर्ष ऊपर के हर जिले में 10 फीसद लोगों का सर्वे करना है। इसके बारे में विभिन्न जानकारियां एक फॉर्म में संग्रह करना है। बीपी-शुगर व अन्य बीमारियों से ग्रसित होने के बाद इलाज की समुचित व्यवस्था करानी है, ताकि गैर संचारित रोगों पर नियंत्रण किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की मानें ताे धनबाद में 30 वर्ष से ऊपर 10 लाख लोग हैं। इनमें से ही 1 लाख लाेगाें काे सर्वे में शामिल किया जाएगा।

60% से ज्यादा मरीज इलाज के लिए जाते हैं बाहर

बेहतर इलाज के लिए धनबाद में सरकारी व कई प्राइवेट अस्पताल हैं। इसके बावजूद यहां कई गंभीर बीमारियाें के इलाज के पर्याप्त इंतजाम नहीं है। कुछ निजी अस्पतालाें में इलाज की सुविधा है भी ताे मध्यमवर्गीय परिवार खर्च में असमर्थ हैं। 60-70 फीसदी मरीज इलाज के लिए दूसरे राज्य व जिलाें में जाते हैं। जिले में राज्य का दूसरा सबसे बड़ा मेडिकल काॅलेज हैं, जहां न्यूराेलाॅजी, साइकेट्रिक, हर्ट स्पेशलिस्ट, ऑकाेलाॅजी, यूराेलाॅजी, गैस्ट्राेइंट्राेलाॅजी के चिकित्सक हैं ही नहींं। हृदय राेग विशेषज्ञ नहीं रहने के कारण कराेड़ाें खर्च कर अस्पताल परिसर में बनाया गया कैथलैब में फिलहाल काेविड सेंटर संचालित है।

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