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सरकारी मजाक:चंद घंटों के लिए अलॉट किया फंड, अफसरों को पता चलने सेे पहले ही राशि वापस, नतीजा- अस्पताल अधूरे, इलाज बाधित

धनबाद17 दिन पहलेलेखक: जीतेंद्र कुमार
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हमारी सेहत से जुड़ी 5 योजनाएं- 5 जगहों पर अस्पताल भवनों का निर्माण या मरम्मत होना है। कहीं काम शुरू ही नहीं हुआ, तो कई जगहों पर यह महीनों से अधूरा पड़ा है। वजह है फंड का अभाव। लेकिन, यह अभाव भी अफसरों को बनाया हुआ सरकारी मजाक लगता है। असल में, इन तमाम योजनाओं के लिए राशि का आवंटन किया गया, लेकिन वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन यानी 31 मार्च, 2022 को। यह आवंटन भी रात 8 बजे या उसके बाद आया। योजनाओं से जुड़े विभागीय अफसरों को जब तक इसकी खबर लगती और वे निकासी की औपचारिकताएं पूरी कर पाते, रात 12 बज जाने से राशि सरेंडर हो गई। किसी योजना में पहली बार, तो किसी में लगातार दूसरे साल ऐसा हुआ। नतीजा है कि पांचों जगहों पर अस्पतालों के भवनों का काम लटका हुआ है और धनबादवासियों को वहां इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

1. एचएससी वासेपुर- क्षेत्र की 1 लाख से ज्यादा आबादी इलाज से है वंचित

वासेपुर में 37 लाख रुपए से स्वास्थ्य उपकेंद्र का भवन बन रहा है। 90% काम हाे चुका है। 12.5 लाख रुपए का भुगतान हाे चुका है। लेकिन, उसके बाद लगातार दाे साल 31 मार्च काे रात में राशि आई और रात 12 बजे सरेंडर हाे गई। ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है।

यह हाेता लाभ - वासेपुर में अभी काेई सरकारी स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। एचएससी बनने पर 1 लाख से ज्यादा आबादी काे स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी।

2. पीएचसी नगरकियारी- नहीं मिलता इलाज, 8 साल से नाममात्र का खुलता है

गाेविंदपुर के नगरकियारी में स्थित पीएचसी का भवन वर्षाें से जर्जर है। 8 साल से इलाज नहीं मिलता। भवन के जीर्णाेद्धार के लिए 31 मार्च काे 13.63 लाख रुपए आवंटित हुए, उसी रात लाैट गए।

यह हाेता लाभ - जीर्णाेद्धार हाेने पर 15 हजार से अधिक की आबादी काे उनकी पंचायत में ही स्वास्थ्य सुविधा मिल पाती।

3. सीएचसी निरसा - जर्जर भवन में ही संचालन, नहीं बढ़ रही हैं सुविधाएं

सीएचसी का नया भवन बनना है। स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर 31 मार्च काे 1.22 कराेड़ रुपए आवंटित हुए और रात 12 बजे राशि सरेंडर हाे गई। राशि के अभाव में काम शुरू ही नहीं हुआ।

यह हाेता लाभ - पुराना भवन है जर्जर। आबादी बढ़ने पर भी विस्तार नहीं हाे सका। नया भवन बनने से बेड बढ़ते, सुविधाएं बढ़तीं।

4. आयुर्वेदिक औषधालय​​​​​​​- ​​​​​​​भवन जर्जर हाेने से आयुर्वेद के तहत नहीं हो रहा इलाज

तेतुलमारी स्थित बाैकाकला राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय की मरम्मत के लिए 4.69 लाख रुपए 31 मार्च की देर रात आवंटित हुए। निकासी नहीं हाेने पर सरेंडर हाे गए। मरम्मत का काम शुरू ही नहीं हुआ।

यह हाेता लाभ - जर्जर भवन में 3 साल से संचालन ठप है। मरम्मत हाेने पर हजाराें लाेगाें काे आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की सुविधा मिलती।

5. स्टेट यूनानी डिस्पेंसरी- भवन बिल्कुल टूटा-फूटा है, 3 साल से बंद है इलाज

वासेपुर में स्टेट यूनानी डिस्पेंसरी के जीर्णाेद्धार के लिए 6.95 लाख रुपए का आवंटन 31 मार्च काे हुअा। विभाग काे पता ही नहीं चला और राशि सरेंडर हाे गई। इस वजह से जीर्णाेद्धार का काम लटक गया।

यह हाेता लाभ - जर्जर वन का जीर्णाेद्धार हाे जाने से इलाके के हजाराें लाेगाें काे वैकल्पिक तरीके से इलाज की सुविधा मिलेगी।

कहते हैं अधिकारी पता ही नहीं चला

"कई याेजनाओं की राशि का आवंटन वित्तीय वर्ष की आखिरी तारीख पर रात में हुआ। उसकी जानकारी समय से नहीं मिली। जब तक पता चलता, राशि वापस हाे चुकी थी। ऐसी याेजनाओं के लिए फिर से विभाग से आवंटन मांगा गया है।’’
- डाॅ आलाेक विश्वकर्मा, सिविल सर्जन, धनबाद

"राशि गलत डीडीओ काेड में भेजी गई थी, जिससे आवंटन की जानकारी ही नहीं मिली। ऐसे में राशि की निकासी नहीं हुई और वह सरेंडर हाे गई। वास्तविक डीडीओ काेड में राशि आवंटित करने के लिए विभाग से पत्राचार किया गया है।’’
- डाॅ निर्मला सिन्हा, जिला आयुष पदाधिकारी, धनबाद

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