निगम की जांच में खुलासा:होल्डिंग खाली जमीन की, लेकिन वहां बड़ी इमारतें बनाकर चला रहे शोरूम, होटल, दुकान व अस्पताल

धनबाद2 महीने पहले
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मेमको रोड स्थित होटल व अस्पताल। - Dainik Bhaskar
मेमको रोड स्थित होटल व अस्पताल।

नगर निगम क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रॉपर्टी टैक्स की चोरी का खेल चल रहा है। खाली जमीन दिखा कर होल्डिंग नंबर लिया गया। उस जमीन पर अब दोपहिया और चारपहिया वाहनों के शोरूम चल रहे हैं, लेकिन निगम को टैक्स खाली जमीन का ही मिल रहा है। यह खुलासा निगम टीम की जांच में हुआ है। खाली जमीन पर वाहनों के शोरूम का संचालन के साथ जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दर्जनों ऐसी बिल्डिंग है, जिन्होंने अभी तक अपने बिल्डिंग का असेसमेंट ही नहीं कराया है। जिन्होंने कराया है, उन्होंने भी अपना वास्तविक कारपेट एरिया नहीं दिखाया है।

जिन बिल्डिंगों की लंबाई-चाैड़ाई 1000 वर्गफीट है, उनका मात्र 300 से 400 वर्गफीट का ही एसेसमेंट कराया है। निगम की ओर से दो दिन पूर्व गोल बिल्डिंग-मेमकाे मोड़ बाईपास रोड स्थित अपार्टमेंट, व्यवसायिक प्रतिष्ठान, वाहनों के शोरूम और होटलों की जांच की गई थी, जिसमें टैक्स की चोरी का खुलासा हुआ। अब ऐसे प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजने की तैयारी है।

वाहन शोरूम एनकेडी व ट्रू वैल्यू की होल्डिंग खाली जमीन की

जांच में वार्ड 22 के बाईपास रोड में स्थित ट्रू वैल्यू और एनकेडी नामक दो वाहन शोरूमों में गड़बड़ी मिली। टीम में शामिल सिटी मैनेजर शब्बीर आलम ने बताया कि इन दोनों भवनों का होल्डिंग टैक्स तो है, लेकिन दोनों होल्डिंग खाली जमीन के समय का है। जमीन पर बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई हैं, लेकिन अभी तक कॉमर्शियल होल्डिंग नहीं ली गई है। भवन निर्माण के बाद टैक्स का फिर से निर्धारण नहीं कराया गया।

होल्डिंग का क्या है नियम

खाली जमीन पर अगर कोई होल्डिंग लेता है तो यह होल्डिंग तभी तक मान्य है जबकि उक्त जमीन पर किसी तरह की निर्माण नहीं हुआ है। निर्माण होने के बाद उसका होल्डिंग बदल जाता है और इसके लिए फिर से सैफ फॉर्म भर कर नए सिरे से भवन का एसेसमेंट कराना हाेगा। अगर भवन आवासीय है तो आवासीय दर पर और अगर भवन का उपयोग कॉमर्शियल रूप से किया जा रहा है तो कॉमर्शियल दर पर होल्डिंग टैक्स का निर्धारण होगा।

सभी को कराना होगा टैक्स का निर्धारण

हाेल्डिंग टैक्स में गड़बड़ी करनेवालों को पहले नोटिस भेजा जाएगा। उसके बाद भी अगर वे नए सिरे से होल्डिंग टैक्स का निर्धारण नहीं कराते हैं, तो उनके खिलाफ नगरपालिका एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसी गड़बड़ी निगमकर्मियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।''

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