लाह उत्पादन:लाह के किसानाें व उद्याेगों के लिए आईआईटी बनाएगा प्लेटफाॅर्म, आय बढ़ाने की हाेगी काेशिश

धनबादएक महीने पहलेलेखक: रवि मिश्रा
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देश में लाह (लाख) का सर्वाधिक उत्पादन झारखंड में हाेता है। भारत में करीब 16,352 टन लाह के उत्पादन में लगभग 8293 टन (54.6%) का याेगदान झारखंड का है। देशभर में सबसे अधिक लाह उत्पादन वाले जिलाें में झारखंड के रांची, सिमडेगा, खूंटी और गुमला शामिल हैं। इसे देखते हुए आईआईटी आईएसएम, धनबाद लाह के किसानाें के लिए एक नया प्लेटफाॅर्म तैयार कर रहा है। ऐसी ब्लाॅकचेन टेक्नाेलाॅजी विकसित की जा रही है, जहां किसान और उद्याेग एक मंच पर साथ हाेंगे।

बिचाैलिए नहीं हाेंगे, जिससे किसानाें की आय भी बढ़ने की उम्मीद है। संस्थान निदेशक प्राे राजीव शेखर ने बताया कि संस्थान के प्रो. शशांक बंसल और प्राे रुचिका सहगल की टीम यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद के एक प्राध्यापक के साथ लाह पर काम कर रहे हैं। एक मशीन भी विकसित की जा रही है। काेशिश है कि किसानाें काे लाह की खेती से अधिक लाभ मिले।

भारत की ओर से लाह का सबसे बड़ा निर्यातक है झारखंड
भारत की और से बांग्लादेश काे 21.3%, यूएसए काे 15.3%, पाकिस्तान काे 12.4%, चीन काे 9.5%, जर्मनी काे 8.5% और स्विट्जरलैंड काे 7.2% लाह निर्यात किया जाता है। अन्य देश भी 70 प्रतिशत तक लाह भारत से ही आयात करते हैं। इस तरह भारत से हाेने वाले कुल निर्यात में आधे से अधिक झारखंड से ही लाह विदेशों को भेजा जाता है।

इन उद्याेगाें में हाेता है लाह का उपयाेग: चूड़ी, हीट एंड वाटरप्रूफ पाॅलिश के साथ सीसा, मेटल, प्लास्टिक, लकड़ी और कपड़े की सीलिंग वैक्स ग्लू बनाने में भी इस्तेमाल होता है।

वेब पाेर्टल व ऐप से जोड़े जाएंगे किसान
प्रो. शशांक बंसल प्रबंध अध्ययन विभाग और प्राे रुचिका सहगल मैथेमैटिक्स एंड कंप्यूटिंग विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं। प्राे सहगल ने बताया कि किसानाें के लिए एक वेब पाेर्टल और एक माेबाइल ऐप बनाए जाएंगे। यहां किसान सीधे लाह संबंधी उद्याेगाें से जुड़े रहेंगे। लाेन कहां से मिल सकता है, उसकी प्रक्रिया क्या है, किसानाें काे बताया जाएगा।

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