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पीके सिंह ने कहा:भारत साल 2050 तक विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हाेगी

धनबाद2 महीने पहले
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डीजीएमएस के स्थापना दिवस पर संबाेधित करते डॉ पीके सिंह। - Dainik Bhaskar
डीजीएमएस के स्थापना दिवस पर संबाेधित करते डॉ पीके सिंह।
  • डीजीएमएस का 120वां स्थापना दिवस मना, खदानाें में सुरक्षा मानकाें का अनुपालन करने पर जाेर

भारत 2050 तक विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अथर्व्यवस्था हाेगी। इसमें माइनिंग एवं मिनिरल इंडस्ट्रीज का याेगदान महत्वपू्र्ण हाेगा। उक्त बातें सिंफर के निदेशक डाॅ पीके सिंह ने कही। वे गुरुवार काे डीजीएमएस की 120वीं स्थापना दिवस बताैर मुख्य अतिथि संबाेधित कर रहे थे। पीके सिंह ने कहा कि वर्ष 2050 तक भारत की 44 ट्रिलियन की अर्थ व्यवस्था में खनिज क्षेत्रक का याेगदान 5 प्रतिशत का रहेेगा। हमें इस दिशा में काम करना है। डीजीएमएस का गाैरवशाली इतिहास रहा है।

इसका भविष्य उज्जवल है। जबतक माइनिंग एवं मिनिरल की जरूरत है तब तक डीजीएमएस रहेगा। खदानाें में सुरक्षा मानकाें का अनुपालन कराना डीजीएमएस की जिम्मेवारी है। डीजीएमएस माइनिंग, मिनिरल मेटेरियल की चिंता करती है। खदानाें में सेफ्टी का स्टैंडर बढ़ा है, लेकिन जाे स्टैंडर हिंदुस्तान जिंक जैसी निजी कंपनियाें की खदानाें में है वह यहां की खदान में नहीं है।

उन्हाेंने डीजीएमएस काे चतावनी भी दी। कहा, हम आईसाेलेशन में नहीं रह सकते। ग्लाेबल एरा के दाैर में हमें अपने आपकाे बदलना हाेगा। हमें यह साेचना हाेगा कि क्या हम नेक्स्ट जेनरेशन के लिए रिलिवेंट हैं या नहीं। ऐसा नहीं हाेने पर केंद्र सरकार डीजीएमएस काे बंद कर देगी। कहा कि स्टार्टअप के माध्यम से युवाओं काे माैका देना चाहिए।

30 साल बाद काेयले का उपयाेग बदल जाएगा

सिंफर निदेशक ने कहा कि काेयले का उपयाेग 30 साल बदल जाएगा। तब हाइड्राेजन और मिथनाल इकनामी स्थान लेगी। काेयला से बिजली बनती है, बल्व जलती है। ऐसा नहीं हाेगा। हमें बदलाव के लिए तैयार रहना हाेगा। मेथड ऑफ वर्किंग बदलना हाेगा। हर क्षेत्र में काफी तेजी से बदलाव हाे रहा है। बदलाव में डीजीएमएस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

खान दुर्घटना शून्य करने के लिए देसी प्लान जरूरी: डीजी

डीजीएमएस के डीजी प्रभात कुमार ने कहा कि खादन दुर्घटनाओं काे शून्य करने के लिए हमें देशी तकनीक खाेजनी हाेगी। विदेशी तकनीक से हम शून्य दुर्घटना के लक्ष्य काे प्रापत नहीं कर सकते। कहा कि इस दिशा में तेजी से परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। हमारे पास संसाधन व उच्च तकनीक की कमी नहीं है। काेड ऑफ प्रैक्टिस बना है। फिर भी हम खतरे की ओर बढ़ जाते हैं।

हमें इस पर राेक लगाने की जरूरत है। काेयला खान दुर्घटना से हाेने वाली माैत एक हजार व्यक्ति में 0.93 से घटकर 0.20 हाे गई है। वहीं नन काेल खदानाें में यही आकड़ा 0.67 से घटकर 0.25 रह गई है। हमारा प्रयास है कि खदानाें में सुरक्षा का मानक बना रहे। कहा कि 119 साल में डीजीएमएस का काफी विकास हुआ है। माैके पर डीडीजी अरविंद कुमार, डीडीजी स्नेहलता सेठी, डायरेक्टर नीरज कुमार, डायरेक्टर अजय कुमार, डायरेक्टर देव कुमार आदि थे।

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