एसएनएमएमसीएच में इलाज ठप:24 घंटे हड़ताल पर रहे जूनियर डॉक्टर बिना इलाज के अपने हाल पर रहे मरीज

धनबाद2 महीने पहले
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इधर, इलाज नहीं होने पर वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजनों ने किया हो-हल्ला। - Dainik Bhaskar
इधर, इलाज नहीं होने पर वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजनों ने किया हो-हल्ला।

वासेपुर में फायरिंग के बाद नन्हे खान को लेकर एसएनएमएमसीएच पहुंचे लोगों की बदसलूकी पर जूनियर डॉक्टर गुरुवार को 24 घंटे हड़ताल पर रहे। बाद में अधीक्षक के आश्वासन पर गुरुवार की शाम काम पर लौटे। जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि वे अब भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और ऐसे में काम करने में मुश्किल हो रही है।

बुधवार को हंगामे के दौरान एक महिला इंटर्न के साथ गाली-गलौज की गई थी और घसीटा भी गया था। ऐसे हंगामे के वक्त अस्पताल में मौजूद गिने-चुने गार्ड और निजी सुरक्षाकर्मी भाग जाते हैं। बार-बार के आश्वासनाें के बावजूद अस्पताल परिसर में सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए।

जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि इस संबंध में वे अधीक्षक से मिले, जिसके बाद डीसी से बात कर जल्द सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया गया। गौरतलब है कि अस्पताल में पुलिस पिकेट निर्माण की तकनीकी स्वीकृति के साथ 24,89,350 रुपए का प्राक्कलन डीडीसी के पास भेजा गया था। अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली व राशि का आवंटन नहीं हुआ।

इधर, इलाज नहीं होने पर वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजनों ने किया हो-हल्ला

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। इमरजेंसी के साथ ही इनडोर वार्ड में मरीजों को देखने वाला कोई नहीं था। इमरजेंसी में लाए गए कई मरीज बिना इलाज के तड़पते रहे। इलाज नहीं होने से मरीज के साथ उनके परिजन परेशान हुए। परिजनों ने इस दौरान कई बार वार्ड में हंगामा किया।

जौंडिस और लिवर के इलाज के लिए आए सिविल कोर्ट में कार्यरत एक कर्मी के परिजन ने बताया कि बहुत मुश्किल से भर्ती कर वार्ड में भेजा गया, पर 12 घंटा बीत जाने के बाद भी कोई डॉक्टर देखने नहीं आया। मरीज की हालत बिगड़ती जा रही है, पर डॉक्टर के बारे में पूछने पर कोई कुछ बता नहीं रहा है। ड्यूटी पर तैनात नर्स ने रात में स्लाइन भी बंद कर दी। बाद में सीनियर डॉक्टर देखने आए।

अधीक्षक के विचित्र बोल : सिस्टम का दोष, कोई सुरक्षित नहीं

अस्पताल के अधीक्षक डॉ एके वर्णवाल ने कहा कि डॉक्टरों के साथ ऐसा दाेबारा न हाे, इसके लिए फिलहाल कुछ नहीं किया जा सकता है। हमने राष्ट्रपिता, प्रधानमंत्री, पूर्व पीएम की हत्या होते देखा है, कोई सुरक्षित नहीं है। सिस्टम बदलेगा, तभी लोग सुरक्षित होंगे। अधीक्षक ने कहा कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा पर डीसी से बात हुई है, जिला प्रशासन पुलिस पिकेट बनाने पर काम कर रहा है। समझाने के बाद जूनियर डॉक्टर फिर से काम पर लौट गए हैं।

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