प्रशासनिक जांच में खुलासा:भू-माफियाओं ने एक ही डीड पर बेची 13.05 एकड़ सरकारी जमीन

धनबाद8 महीने पहले
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  • 74 कब्जाधारी, इनमें 30 ही सुनवाई के लिए पहुंचे सीओ काेर्ट
  • विकास हाउसिंग सोसाइटी के नाम पर डीड बनाकर किया गया फर्जीवाड़ा

धनबाद अंचल के हीरक राेड स्थित 28 नंबर खाता की गैर आबाद जमीन पर कब्जा जमाने के लिए भू-माफियाओं ने कई स्तर पर फर्जीवाड़े काे अंजाम दिया। आमाघाटा माैजा का 28 नंबर खाता की 103 एकड़ से अधिक जमीन सरकारी है।

इस जमीन काे राज्य सरकार द्वारा बंदाेबस्ती प्राप्त व्यक्ति ही कानूनन जमीन पर कब्जे के लिए अधिकृत है, लेकिन भू-माफियाओं ने निबंधन विभाग व अंचल कार्यालय से सांठगांठ कर सरकारी जमीन पर कब्जा जमाने के लिए कई हथकंडे अपनाए। 28 नंबर खाता के प्लाॅट नंबर 187, जिसमें 13.05 एकड़ जमीन है, इसमें भू-माफियाओं ने धनबाद विकास हाउसिंग कंस्ट्रक्शन काे-ऑपरेटिव साेसाइटी के नाम पर डीड बनाकर 187 नंबर प्लाॅट की सभी 13.05 एकड़ जमीन काे बेच दिया है।

इसी प्लाॅट में काेका माेची के नाम से 70 डिसमिल जमीन की जमाबंदी दिखाकर साढ़े चार एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री कर दी गई। कई जगहाें पर रैयती जमीन दिखाकर आमाघाटा माैजा में कई एकड़ गैर आबाद जमीन लाेगाें काे बेची गई। डीसी ने पूरे मामले की जांच के लिए नाै सदस्यीय जांच टीम गठित की है जाे आमाघाटा माैजा के सभी 103 एकड़ जमीन की जमाबंदी की जांच कर रही है। डीसी ने एक सप्ताह के अंदर जांच रिपाेर्ट साैंपने का निर्देश है, जिसमें और भी चाैंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

सरकारी जमीन पर कब्जे की जानकारी मिलने पर डीसी उमा शंकर सिंह मापी का निर्देश दिया था। इसमें प्लाॅट 187, 184 और प्लाॅट संख्या 33 की मापी पूरी भी हाे गई है। 187 नंबर प्लाॅट में सीमांकन के बाद कुल 74 कब्जाधारियाें काे चिह्नित किया था। दावा-आपत्ति की जांच काे लेकर सीओ काेर्ट में सुनवाई हुई थी, इसमें 30 लाेग ही हाजिर हुए थे। इसमें 22 लाेगाें ने ही कागजात सीओ काेर्ट में जमा किया था। 8 लाेगाें ने माैखिक दावा-आपत्ति दर्ज कराए थे। उसके बाद प्रशासन ने 22-25 अस्थायी कंस्ट्रक्शन तोड़ डाले।

हाईकाेर्ट तक पहुंचा मामला 24 मार्च काे अगली सुनवाई

प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने का मामला झारखंड हाईकाेर्ट तक पहुंच गया। याचिकाकर्ता गर्जन मरांडी ने प्लाॅट नंबर 187 में 1.43 तथा प्लाॅट नंबर 143 में 0.57 एकड़ जमीन की जमाबंदी दादा काेका मांझी के नाम से हाेने की दलील थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह जमाबंदी 1955-56 में ही खाेली गई थी, जिसकी लगान रसीद 2008-9 तक जमा है। सुनवाई के बाद हाईकाेर्टृ ने 24 मार्च काे अगली सुनवाई तक 2 एकड़ जमीन पर किसी तरह के कंस्ट्रक्शन काे हटाने पर राेक लगा दी है।

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