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आरोपों की जांच:सीएमपीएफ के ज्वाइंट कमिश्नर पर मेजर पेनल्टी की सिफारिश, बर्खास्तगी भी संभव

धनबाद7 दिन पहलेलेखक: संजय मिश्रा
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  • विभागीय जांच में दोषी मिले कमल, सचिव को रिपोर्ट
  • सीवीसी की चार्जशीट में भी दोषी मिले थे कमल, उसके बाद हुई विभागीय जांच

काेयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) के ज्वाइंट कमिश्नर उमेश प्रसाद कमल के खिलाफ काेयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव भवानी पति ने काेयला सचिव से मेजर पेनाल्टी की कार्रवाई की अनुशंसा की है। कमल पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच संयुक्त सचिव पति कर रहे थे।

मेजर पेनल्टी के तहत नाैकरी से बर्खास्तगी, वर्तमान पद से डिमाेशन अथवा दाे से चार इंक्रीमेंट की कटाैती करने का प्रावधान है। कमल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आराेपाें की जांच कर रहे केंद्रीय सतर्कता आयाेग (सीवीसी) ने पहले ही मेजर पेनाल्टी की अनुशंसा काेयला मंत्रालय से की थी।

सीवीसी की जांच रिपाेर्ट के बाद मंत्रालय ने विभागीय जांच के लिए ज्वांइंट सेक्रेटरी भवानी पति काे नियुक्त किया था। ज्वांइंट सेक्रेटरी ने जांच में सीवीसी की रिपाेर्ट काे सही पाया। सीवीसी और विभागीय जांच के साथ भ्रष्टाचार की जांच धनबाद सीबीआई भी कर रही है। सीएमपीएफओ रिजन दाे के आयुक्त माे एहतेशाम अली के लिखित आवेदन पर सीबीआई ने 29 नवंबर 2018 काे ज्वांइंट कमिश्नर यूपी कमल, रिजन तीन के कमिश्नर गाैतम सेनगुप्ता समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

ट्रस्टी बोर्ड की शिकायत पर आयुक्त ने भी की थी जांच
कमल पर आरोप है कि उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए जेनरल फाइनेंशियल रूल का उल्लंघन किया। ट्रस्टी बाेर्ड के सदस्याें की शिकायत पर बाेर्ड के चेयरमैन तत्कालीन काेयला सचिव सुशील कुमार ने तत्कालीन आयुत बीके पांडा काे जांच कराने का आदेश दिया था। पांडा ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। कमेटी ने कमल काे दाेषी ठहराते हुए रिपाेर्ट आयुक्त पांडा और सीवीओ भेज दी थी। रिपाेर्ट के आधार पर जांच करते हुए सीवीसी ने भी कमल काे दाेषी ठहराते हुए मेजर पेनाल्टी की अनुशंसा काेयला सचिव से की थी।

500 पन्ने बाहर से फोटोकॉपी कराकर ले जाने का भी आरोप
सीएमपीएफओ के तत्कालीन क्षेत्रीय आयुक्त 2 (प्रशासन) एचडी पाठक ने 2017 में एफआर 56 (जे) और रूल 48 (आई) (बी) आफ सीसीएस (पेंशन) रूल्स 1972 के तहत काेयला मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी काे रिपाेर्ट करते हुए कमल काे सेवामुक्त करने की अनुशंसा की थी, जाे सरकार के पास विचाराधीन है। कमल पर छतीसगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय जाकर क्षेत्रीय आयुक्त काे बिना सूचना दिए उनकी अनुपस्थिति में कार्यालय के विभिन्न फाइलाें का 500 पेज बाहर की किसी दुकान से फाेटाें कॉपी करा कर अपने साथ ले जाने का भी आराेप है।

सचिव करेंगे सजा का निर्धारण

सीवीसी की चार्जशीट में कमल के खिलाफआ राेप साबित हाे चुका है। पेनाल्टी भी अवार्ड हाे चुका है। मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने भी जांच रिपाेर्ट साैंप दी है। मेजर पेनाल्टी के तहत काेयला सचिव काे सजा का निर्धारण करना है।
-आरएस कश्यप, रीजनल कमिश्नर,सीएमपीएफ,जबलपुर

इंक्वायरी प्रोसेस चल रहा है

इंक्वायरी प्राेसेस चल रहा है। डिसीप्लीनरी अथॉरिटी इस मामले को देखेगी। अपने खिलाफ हुई जांच के बारे में मुझे विशेष कुछ नहीं कहना है।
-यूपी कमल, ज्वाइंट कमिश्नर, सीएमपीएफ, धनबाद

1. वित्तीय वर्ष 2015-16 में वेलफेयर फंड से सीएमपीएफओकर्मियाें काे गिफ्ट करने के लिए 34.30 लाख रुपए की वीआईपी ट्रॉली की सीधी खरीदारी की।

2.ओमनी इंफाेवर्ड प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली से नियमविरुद्ध 66,169 रुपए की दर से 3 करोड़ 30 लाख 84 हजार 500 रुपए में 500 कंप्यूटरों की खरीदारी का है।

3. सीएमपीएफ मुख्यालय कार्यालय की मरम्मत का काम एक ही ठेकेदार मेसर्स टीएच इंटरप्राइजेज काे 19 लाख 12 हजार 477 रुपए में दिया।

4. कंप्यूटर सिस्टम का काम करने वाली कंपनी सैप का लाइसेंस 2008 में टर्मिनेट होने के बाद रेलटेल काे 18 कराेड़ 82 लाख 15 हजार 443 रुपए का काम सौंप दिया। फिर रेलटेल को 80 प्रतिशत राशि 15 कराेड़ 5 लाख 72 हजार 354 रुपए का एडवांस भी दे दिया गया। पूरी प्रक्रिया में कमल प्राेजेक्ट काे-आर्डिनेटर की भूमिका में थे।

5. सैप कंपनी ने सीएमपीएफ में 30 अप्रैल 2009 तक सेवा दी, जबकि कमल ने ट्रस्टी बाेर्ड काे गुमराह करते हुए 31 नवंबर 2009 तक का 74 लाख 13 हजार 12 रुपए का भुगतान ओमनी इंफाेवर्ड प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली काे कराया।

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