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नए काेर्स:आईआईटी में अब गहरे समुद्र व ग्रहाें पर खनन पर शुरू हाेगी पढ़ाई, इंटरनेशनल सी बेड अथाॅरिटी ने भी दी स्वीकृति

धनबाद2 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • आईआईटी आईएसएम धनबाद में जल्द ही शुरू हाेंगे दाे नए काेर्स
  • सिलेबस में स्मार्ट, सस्टेनेबल व सेफ माइनिंग पर किया जाएगा फाेकस

इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स अब डीप सी माइनिंग (गहरे समुद्र में खनन) और एस्ट्राॅयड माइनिंग (ग्रह में खनन) की भी पढ़ाई कर पाएंगे। इसकी तैयारी आईआईटी आईएसएम, धनबाद ने शुरू कर दी है। दरअसल ओपेन कास्ट खत्म हाेने के बाद माइनिंग के लिए एक-दाे किलाेमीटर गहराई में जाने की जरूरत महसूस हाेगी। ऐसे में ओपेन कास्ट माइनिंग का भविष्य बहुत लंबा नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर अंडरग्राउंड माइनिंग भी अब कम ही हाे रहा है। इसलिए अब समुद्र तल के नीचे एक्सप्लाेरेशन की तैयारी शुरू कर दी गई है।

4-5 हजार मीटर से नीचे जाकर खनन काे लेकर पड़ताल किया जाएगा। इस पर इंटरनेशनल सी बेड अथाॅरिटी ने भी अपनी स्वीकृति दे दी है। पहले एक्सप्लाेरेशन और फिर माइनिंग की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। ऐसे में भविष्य की माइनिंग प्रक्रिया क्या और कैसी हाेगी, यह सब कुछ स्टूडेंट्स जान पाएंगे। माइनिंग के सिलेबस में अब इसके भी कंटेंट पर फाेकस किया जाएगा। हालांकि इस काेर्स का स्वरूप कैसा हाेगा, इस पर निर्णय अभी नहीं लिया जा सका है। संस्थान निदेशक प्राे राजीव शेखर ने कहा कि भविष्य में समुद्र के नीचे खनन हाेगा। समुद्र तल के नीचे बहुत खनिज मिलने की संभावना है।

गहरे समुद्र में मिल सकती हैं बेशकीमती खनिज

गहरे समुद्र में बेशकीमती खनिज मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस संबंध में प्राे धीरज कुमार ने बताया कि गहरे समुद्र में निकेल, कैडियम, काॅपर मिलने की उम्मीद है। मैंगनीज पहले ही देखा जा चुका है।ऐसे में डीप सी माइनिंग भविष्य की माइनिंग हाेगी। इसी तरह दूसरे ग्रहाें पर माइनिंग पूरी तरह राेबाेटिक हाे सकती है। हालांकि इस पर अभी विमर्श शुरू ही हुए हैं।

स्मार्ट व सुरक्षित खनन पर फोकस

प्राे धीरज कुमार ने बताया कि पारंपरिक खनन प्रक्रिया के साथ-साथ डीजीटल माइनिंग प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अब माइनिंग के सिलेबस में स्मार्ट, सस्टेंनेबल और सेफ माइनिंग पर फाेकस किया जाएगा। इन तीनाें काे पाने के लिए माइंस का ऑटाेमेशन और सेमी ऑटाेमेशन जरूरी है। भारत में बेसिक माइनिंग काे भी बेहतर बनाए जाने की जरूरत है। देश में केवल हिंदुस्तान जिंक की माइंस में ऑटाेमेशन हाे चुका है। सरफेस माइंस में अभी मेकेनाइजेशन ही हुआ है, ऑटाेमेशन नहीं हुआ है।

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