अब मिलेगी नई पहचान:माथे की बिंदिया व गले में हार बन सजेगा हमारा काेयला

धनबाद2 महीने पहलेलेखक: रवि मिश्रा
  • कॉपी लिंक
अब तक तैयार की गई ये ज्वेलरी - Dainik Bhaskar
अब तक तैयार की गई ये ज्वेलरी

बिजली उत्पादन में ईंधन बनकर हमारे घर-आंगन काे जगमगाने वाला हमारा काेयला अब बिंदिया के रूप में माथे और हार के रूप में हमारे गले की भी शाेभा बढ़ाएगा। घर की सजावट में भी यह चार चांद लगाएगा। सीएसआईआर-सिंफर, धनबाद ने ईंधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले काेयले का वह रूप सामने लाने की काेशिश की है, जाे अब तक दुनिया ने नहीं देखा। निदेशक डाॅ. प्रदीप सिंह के नेतृत्व में संस्थान की टीम ने काेयले से जेवर व घर के इंटीरियर डेकोरेशन के उपयाेग में आने वाले साजाे-सामान तैयार किए हैं।

ये न सिर्फ उपयाेगी और मजबूत हैं, बल्कि देखने में भी बेहद खूबसूरत हैं। संस्थान इन उत्पादों काे लाेगाें तक पहुंचाने के लिए जल्द किसी कंपनी से करार करेगा। संस्थान के डाॅ. सेल्वी कहते हैं कि ब्लैक कार्बन का उपयाेग कर सामग्रियां बनाई जा रही हैं।

देश की काेयला राजधानी में स्थित सीएसआईआर-सिंफर की काेशिश है कि हमारा काेयला काले हीरे की तरह देश-दुनिया में चमके। ईंधन के विकल्पाें समेत अन्य रूपाें में भी इसका इस्तेमाल बढ़े। इसी वजह से संस्थान ने काेल क्राफ्ट (शिल्प), काेल आर्ट (कला), काेल ज्वेलरी (आभूषण), काेल एथनिक आर्ट (पारंपरिक) और काेल माॅडर्न आर्ट (आधुनिक कला) के विषय पर काम शुरू किया है।

स्थानीय महिलाओ काे स्वराेजगार देने की काेशिश : काेयले से आइटम तैयार करने वाली टीम में शामिल डाॅ. आशीष मुखर्जी कहते हैं कि आर्ट एंड क्राफ्ट, ज्वेलरी बनाने के काम में स्थानीय महिलाओ काे भी जाेड़ने की काेशिश की जा रही है, ताकि उन्हें राेजगार मिले। समुद्री शहराें में जिस तरह समुद्री पदार्थाें से जुड़े सामान का व्यापार हाेता है, उसी तरह यहां काेयले से आकर्षक चीजें बनाई जा रही है।

खबरें और भी हैं...