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झरिया पुनर्वास पर रांची में कार्यशाला:झरिया व कतरास के अग्निप्रभावितों को आसपास के क्षेत्रों में ही, बसाने का प्रस्ताव

धनबाद17 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो
  • प्रभावितों के पुनर्वास पर मंत्रालय ने किया मंथन
  • दाे सत्र में हुई कार्यशाला में विभिन्न मुद्दाें पर चर्चा हुई

झरिया और रानीगंज के रिवाइज्ड मास्टर प्लान काे लेकर बुधवार काे रांची में कार्यशाला हुई, जिसमें मुख्य ताैर पर काेयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव, अवर सचिव और काेल इंडिया के डायरेक्टर माैजूद थे। दाे सत्र में हुई कार्यशाला में विभिन्न मुद्दाें पर चर्चा हुई। काेल मंत्रालय के अपर सचिव विनाेद कुमार तिवारी ने झरिया में आग बुझाने काे लेकर बीसीसीएल के अब तक के प्रयासाें पर नाराजगी व्यक्त की।

उन्हाेंने कहा कि ईसीएल रानीगंज काेलियरी क्षेत्र में ऊपरी सतह पर लगी आग पर काबू पाने में सफल रही है, जबकि झरिया में अब भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। जेआडीए एमडी सह धनबाद डीसी संदीप सिंह ने झरिया पुनर्वास में तेजी लाने के लिए झरिया, धनबाद, केंदुआ, करकेंद, पुटकी, कतरास, बाघमारा सहित अन्य क्षेत्राें में रहने वाले प्रभावित परिवाराें काे तीन टाउनशिप एरिया में बसाने का सुझाव रखा गया है, जिससे लाेगाें काे भाैगाेलिक और सामाजिक वातावरण मिल सके। कार्यक्रम में काेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव बीबी पत्ती, राज्य सरकार के खनन सचिव के श्रीनिवासन, बीसीसीएल सीएमडी पीएम प्रसाद, जेआरडीए के चीफ इंजीनियर देवेंद्र कुमार चाैधरी सहित अन्य माैजूद थे।

लोगों को स्थानीय स्तर पर बसाने पर तेज होगा पुनर्वास

जेआडीए ने स्थानीय आधारित टाउनशिप निर्माण का सुझाव रखा। इसमें कतरास, बाघमारा, पुटकी, केंदुआ, करकेंद आदि क्षेत्र के लाेगाें काे कतरास क्षेत्र में तथा झरिया और आसपास के लाेगाें के लिए बेलगड़िया सहित अन्य जगहाें पर आवासीय काॅलाेनी बनाया जाए। उसी तरह धनबाद और गाेविंदपुर काेलियरी क्षेत्राें में रहनेवाले परिवाराें के लिए स्थानीय स्तर पर ही आवासीय काॅलाेनी बनाया जाए। अन्य सभी टाउनशिप एरिया काे म्यूनिस्पल एरिया में शामिल किया जाए।

पुनर्वास काे लेकर दाे सबसे बड़ी बाधाएं

1. जमीन की अनुपलब्धता

जेआरडीए का कहना था कि झरिया पुनर्वास में तेजी नहीं आने का सबसे बड़ा कारण जमीन की अनुपलब्धता है। स्मार्ट सिटी की तर्ज पर छाेटे स्तर पर विभिन्न क्षेत्राें में टाउनशिप निर्माण के लिए 1500 एकड़ जमीन चाहिए। बीसीसीएल ने अब तक 700 एकड़ जमीन चिह्नित कर दी है, उसमें ज्यादातर विवादित हैं। जब तक जमीन नहीं मिलेगी, पुनर्वास याेजना गति नहीं पकड़ सकती है।

2. रैयताें का आर्थिक सर्वे

2019 के नया सर्वे में 1.04 लाख रैयत और गैर रैयत परिवाराें काे पुनर्वास के लिए चिह्नित किया गया है। एलटीएच रैयत परिवाराें काे किस आधार पर बसाया जाए, इसकाे लेकर काेई आर्थिक सर्वे नहीं किया गया है कि किस व्यक्ति के पास जमीन, मकान सहित कितनी अचल संपत्तियां हैं। उन परिवाराें काे पुनर्वासित करने का क्या फार्मूला हाेगा, स्पष्ट नहीं है। कट ऑफ डेट भी स्पष्ट नहीं किया गया है।

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