हनुमान जी को नोटिस-10 दिन में मंदिर खाली करें:रेलवे ने मंदिर के बाहर चिपकाया नोटिस; कहा- नहीं माने तो कार्रवाई करेंगे

धनबाद3 महीने पहले

झारखंड के धनबाद में रेलवे ने हनुमान जी को मंदिर खाली करने का नोटिस थमा दिया। ईस्ट सेंट्रल रेलवे ने मंगलवार शाम को मंदिर के बाहर ये नोटिस लगाया। यह हनुमानजी के नाम से है। उसमें लिखा है, आपका मंदिर रेलवे की जमीन पर है। वहां अवैध कब्जा किया गया है। नोटिस मिलने के 10 दिनों के अंदर मंदिर हटा लें और जमीन खाली कर दें। नहीं तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला धनबाद के बेकारबांध इलाके का है। खटीक बस्ती में रेलवे ने अपनी जमीन खाली कराने के लिए नोटिस चिपकाया है। रेलवे ने ना सिर्फ हनुमान मंदिर बल्कि आसपास की अवैध झुग्गी-झोपड़ियों को भी हटाने को कहा है।

यह भूल से हुआ या कुछ और बात है बताएंगे, लेकिन उससे पहले इस सवाल का जवाब दे दीजिए।

रेलवे के अधिकारी ने कहा कि गलती से हनुमान जी का नाम लिख दिया गया।
रेलवे के अधिकारी ने कहा कि गलती से हनुमान जी का नाम लिख दिया गया।

रेलवे ने कहा गलती हो गई
सीनियर सेक्शन इंजीनियर धनबाद रेल मंडल एस के चौधरी ने कहा कि ये मानवीय भूल है। नोटिस में गलती से हनुमान जी का नाम लिख दिया गया है। इसे सुधार किया जाएगा। और आगे से ऐसी गलती ना हो इसका भी ध्यान रखा जाएगा। किसी की भावनाओं को आहत करना विभाग का मकसद नहीं था। हमें बस जमीन से अतिक्रमण हटाना था ।

रेलवे ने मंदिर के बाहर नोटिस लगाकर 10 दिन में खाली करने के आदेश दिए हैं।
रेलवे ने मंदिर के बाहर नोटिस लगाकर 10 दिन में खाली करने के आदेश दिए हैं।

20 सालों से रह रहे हैं लोग
बेकार बांध के खटीक मोहल्ले में 20 सालों से लोग रेलवे की जमीन पर रह रहे हैं। यहां खटीक समुदाय के लोग मुख्यत: उत्तर प्रदेश से आए हैं। झुग्गी-झोपड़ी बनाकर सालों से पानी फल, मछली, सब्जी समेत अन्य छोटे-छोटे कारोबार करते हैं। रेलवे की टीम ने मोहल्ले में सभी घरों को अवैध कब्जा बताकर खाली करने का नोटिस चिपका दिया है। सभी घरों को उनके नाम से दीवार पर नोटिस चिपकाया गया है। इस इलाके में 300 से ज्यादा परिवार रहते हैं।

नोटिस के बाद लोगों में गुस्सा है। यहां 300 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं।
नोटिस के बाद लोगों में गुस्सा है। यहां 300 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं।

मंदिर की संपत्ति को देवता की ही मानता है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2021 में अपने एक फैसले में कहा था कि किसी भी मंदिर की संपत्ति देवता की ही होती है। रेवेन्यू रिकॉर्ड में देवता के नाम पर संपत्ति होना कानूनन सही है। पुजारी केवल उस मंदिर में काम करता है। यह केस मध्य प्रदेश का था। जिसमें रेवेन्यू रिकॉर्ड में मंदिर की संपत्तियों से पुजारियों के नाम हटाने के सर्कुलर को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने इस सर्कुलर को बरकरार रखा था।