पेमेंट नहीं तो बिजली गुल:राज्य पर 2160 करोड़ रुपए बकाया, डीवीसी ने शुरू की 50% तक बिजली कटौती, धनबाद शहर में साढ़े चार घंटे का कट

धनबाद2 महीने पहलेलेखक: पंकज त्रिपाठी
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चतरा में निगम बिछा रहा है ट्रांसमिशन लाइन। - Dainik Bhaskar
चतरा में निगम बिछा रहा है ट्रांसमिशन लाइन।
  • विवाद का कारण - बिजली वितरण निगम न रुटीन बिजली बिल का पूरा भुगतान कर रहा और न ही पुराने बकाए का
  • विवाद का असर - बड़े उद्योग सीधे डीवीसी से लेने लगे बिजली ताकि कट न लगे, लेकिन छोटे उद्योगों की हालत खराब

दामाेदर घाटी निगम (डीवीसी) ने झारखंड बिजली वितरण निगम द्वारा 2160 कराेड़ रुपए के बकाए का भुगतान न करने पर अपनी आपूर्ति वाले धनबाद समेत सात जिलों में 50% बिजली कटाैती शुरू कर दी है। शहरों में औसतन चार घंटे तो उद्योगों में करीब सात घंटे तक कट लग रहे हैं। इससे इन सातों जिलों-धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, रामगढ़, कोडरमा, चतरा और हजारीबाग में बिजली की भारी किल्लत हो गई है। ग्रामीण क्षेत्र की हालत तो और खराब है।

कटौती से पहले डीवीसी ने बिजली निगम को इस संबंध में नोटिस दिया था। इसमें कहा था कि वित्तीय स्थिति ठीक न होने के कारण वह कोयला नहीं खरीद पा रहा है। इसलिए बकाए का तत्काल भुगतान करे, वरना पांच नवंबर से बिजली कटौती शुरू कर दी जाएगी। उधर, बड़े उद्योग सीधे डीवीसी से बिजली लेने लगे हैं, ताकि बार-बार कट का सामना न करना पड़े।

लेकिन छोटे उद्योगों की स्थिति दयनीय है। वे जेनरेटर के सहारे उद्योग चलाने को विवश हो गए हैं। झारखंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश केजरीवाल ने कहा-हमने जियाडा के अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा दिया है। कुछ समय पूर्व से राज्य सरकार ने भी डीवीसी पर निर्भरता खत्म करने की कवायद शुरू कर दी है। डीवीसी सप्लाई वाले जिलों में अपनी ट्रांसमिशन लाइन बिछा रही है। यहां सेंट्रल पूल और राज्य में उत्पादित बिजली की सप्लाई की जा सकती है।

केंद्र VS राज्य... डीवीसी ने राज्य के खाते से बकाया काटना शुरू किया तो राज्य ने डीवीसी एरिया में ट्रांसमिशन लाइन डाली

20 साल से विवाद, 2017 में हुआ समझौता, फिर भी तनातनी कायम

विवाद करीब 20 साल से चल रहा है। वर्ष 2017 में त्रिपक्षीय समझौता हुआ। इसमें राज्य सरकार ने माना कि भुगतान नहीं हुआ तो केंद्र आरबीआई को पैसे काटने का आदेश दे सकता है। राज्य सरकार ने कहा कि वह मंथली पावर सप्लाई के एवज में 100 करोड़ रुपए का भुगतान करेगी, लेकिन वह भी नियमित रूप से नहीं हो पाई। केंद्र ने समझौते के अनुरूप 2020 में झारखंड के खाते से 1421 करोड़ काट भी लिए। झारखंड की मासिक देनदारी 160 करोड़ रुपए है, लेकिन भुगतान 100 करोड़ ही हो पा रहा है। इससे बकाया बढ़कर 2160 करोड़ रुपए हो गया।

गिरिडीह में सर्वाधिक कटौती, उद्योगों में 8 घंटे तक

झारखंड चैंबर के प्रमंडलीय उपाध्यक्ष व गिरिडीह के व्यवसायी निर्मल झुनझुनवाला ने बताया कि 200 से अधिक इंडस्ट्रीज बिजली की किल्लत से जूझ रही हंै। यहां उद्योगों में सर्वाधिक आठ घंटे और शहरी क्षेत्र में करीब पांच घंटे कटौती हो रही है। अब हमें जेनरेटर के भरोसे रहना पड़ता है। जेनरेटर से बिजली उत्पादन करने में प्रति यूनिट 34 रुपए का खर्च पड़ता है। वहीं बोकारो के चास शहरी क्षेत्र में चार से छह घंटे, कोडरमा में शहरी क्षेत्र में चार तो उद्योगों में आठ घंटे कट लग रहे हैं। धनबाद शहर में साढे चार घंटे, हजारीबाग में शहरों में चार घंटे और रामगढ़ में शहरों में चार घंटे तो उद्योगों में करीब छह घंटे की बिजली कटौती हो रही है।

डीवीसी ने बढ़ाया दबाव, भुगतान की तैयारी में सरकार

बकाया राशि का भुगतान न होने से इस बार डीवीसी ने काफी सख्त रुख अपना लिया है। डीवीसी के मुख्य प्रबंधक (वाणिज्यिक) डी. डे ने हाल ही में झारखंड बिजली वितरण निगम के जीएम (सीएंडआर) को पत्र लिखा था। कहा था कि 100 करोड़ रुपए के आंशिक भुगतान के कारण बकाया राशि बढ़कर 2160 करोड़ हो गई है। अगर भुगतान नहीं हुआ तो बिजली कटौती की जाएगी। उधर, सरकार भी भुगतान की तैयारी में जुट गई है। ऊर्जा सचिव अविनाश कुमार ने कहा कि भुगतान के मुद्दे पर सरकार गंभीर है। डीवीसी से कहा गया है कि वह बिजली की कटौती न करे। निगम की वित्तीय स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। जल्दी ही उनके बकाए का भुगतान कर दिया जाएगा।

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