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झारखंड में एक पिता का संघर्ष:बेटे को थैलेसीमिया, इसलिए ए निगेटिव ब्लड के लिए पिता हर माह एक बार साइकिल से 400 किमी तक करते हैं सफर

जामताड़ा15 दिन पहले
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बच्ची को साइकिल पर ले जाते पिता - Dainik Bhaskar
बच्ची को साइकिल पर ले जाते पिता

थैलेसीमिया यानी शरीर में खून का नहीं बनना। इस आनुवांशिक बीमारी से गोड्‌डा के प्रतापपुर गांव का 5 साल का विवेक ग्रसित है। पिता दिलीप यादव (40) बेटे की जिंदगी बचाने के लिए दो यूनिट खून के लिए जद्दोजहद करते हैं। गरीब हैं, आवागमन के लिए सिर्फ एक साइिकल है, जिससे वे बेटे को साथ लेकर ए निगेटिव ग्रुप के खून की व्यवस्था के लिए हर माह एक दिन 400 किमी तक की दूरी तय करते हैं।

शुक्रवार को जामताड़ा के दो युवक चेतन कृष्ण यादव और विश्वजीत सिंह ने एक-एक यूनिट ब्लड डोनेट किया, जिसे बेटे को चढ़वाकर वे शनिवार को घर लौटे। दिलीप यादव ने बताया कि मेहरमा प्रखंड के माल प्रतापपुर गांव स्थित उनका घर गोड्‌डा मुख्यालय से 40 किमी और अंदर है। इसलिए उन्हें दूसरे जिले जाने के लिए अतिरिक्ति दूरी तय करनी पड़ती है।

दिल्ली में 3 साल मुफ्त मिलता रहा खून, लॉकडाउन में लौटना पड़ा

दिलीप यादव कहते हैं- विवेक को जन्म के पांच माह बाद अचानक सर्दी, खांसी, बुखार रहने लगा। पीरपैंती के डॉक्टर अरुण से जांच कराई तो उन्होंने बताया कि इसे थैलेसीमिया है। शरीर में खून नहीं बनने के कारण इसे हर माह खून चढ़ाना होगा। उन्हें इस पर विश्वास नहीं हुआ तो वे बच्चे को लेकर भागलपुर चले गए। वहां शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके सिन्हा ने भी चेकअप के बाद यही बात दोहराई। इसके बाद बेटे को लेकर दिल्ली चले गए। वहां सफदरगंज अस्पताल में कई माह मुफ्त में खून मिलता रहा। पिछले साल लॉकडाउन हुआ तो उन्हें घर लौटना पड़ा।

सहयोग के लिए महगामा विधायक को दिए कागजात

दिलीप ने बताया कि दुनिया में भले लोगों की कमी नहीं है, बिना जान-पहचान के भी उनके महादान से विवेक जिंदा है। डॉक्टरों ने कहा है कि स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से यह बीमारी दूर हो सकती है, लेकिन इसके लिए 10 लाख रुपए की जरूरत है। महगामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह को भी गंभीर बीमारी योजना के तहत इलाज कराने के लिए कागजात दिए हैं। अब कहीं से भी मदद मिली तो दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में इलाज कराएंगे।

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