झमाडा में वेतन घोटाला:झमाडा के क्लर्कों ने खुद तय किया वेतन, ऑडिट में पकड़ाया मामला, ~1.90 करोड़ की होगी वसूली

धनबाद3 महीने पहले
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  • 20 किरानियों ने गलत संवर्ग में अपनी बहाली इंट्री कराकर बढ़वाया था वेतन

झमाडा में कर्मचारियाें के वेतन निर्धारण पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। जिन क्लर्कों काे 4000 से 6000 रुपए वेतन मिलना चाहिए था, उन्होंने अफसराें से सांठ-गांठ कर अपना वेतन बढ़ा लिया। अब इन क्लर्कों को 40 से 50 हजार रुपए वेतन मिल रहा है। झमाडा में हुए इस वेतन घाेटाले का खुलासा वित्त विभाग की स्पेशल ऑडिट में हुआ है। ऑडिट टीम ने अपनी रिपाेर्ट में झमाडा कर्मियाें काे अधिक वेतन लिए जाने की पुष्टि करते हुए कर्मियाें की इस कार्रवाई काे वेतन घाेटाला, गबन और वित्तीय अनियमितता बताया है।

ऑडिट रिपाेर्ट में झमाडा के प्रबंध निदेशक से सभी कर्मियाें से भुगतान की गई अधिक राशि की वसूली की अनुशंसा की है। टीम ने खुलासा किया कि कर्मियाें ने 1 कराेड़ 90 लाख 44 हजार 251 रुपए अधिक लिए हैं। इनमें क्लर्क वर्ग के 20 कर्मचारी शामिल हैं।

मुफ्फ‌सिल कर्मी, पर वेतन सचिवालय संवर्ग का तय कराया
जिन क्लर्काें पर अधिक वेतन निर्धारित करने का आराेप है, उन सब की बहाली झमाडा में निम्नवर्गीय लिपिक के पद पर हुई थी। उस समय उनका वेतनमान 4000 से 6000 निर्धारित था। 1 जनवरी 1996 में इन सभी का वेतनमान 4000 से 9000 रुपए कर दिया। षष्ठम वेतन के साथ सभी काे दाे-दाे एसीपी का भुगतान भी कर दिया गया। एसीपी भुगतान में भी नियमाें की अनदेखी की गई।

जिसे एसीपी 4500 से 7000 रुपए मिलना चाहिए था, उसे 10000 से 15200 कर दिया गया। 2012 में तत्कालीन एमडी बदरुजमा अंसारी के समय कर्मियाें ने अपना वेतनमान संचिवालय संवर्ग के अनुरूप करा लिया। झमाडा के कर्मी सचिवालय संवर्ग में नहीं आते हैं। वे मुफ्फसिल के कर्मचारी हैं।

वेतन संचिका से खुला भेद
वित्त विभाग की ऑडिट टीम पिछले साल नवंबर में धनबाद आई थी। टीम ने कर्मियाें के वेतन निर्धारण की संचिका की जांच की ताे गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। ऑडिट टीम ने साेमवार काे अपनी रिपाेर्ट झमाडा एमडी काे साैप दी।

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