सीवरेज एंड ड्रेनेज सिस्टम की डीपीआर का ड्राफ्ट तैयार:शहर के नालों का गंदा पानी साफ होकर बहेगा दामोदर में

धनबाद2 महीने पहलेलेखक: विजय पाठक
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मटकुरिया नाले पर भी बनेगा पंपिंग स्टेशन। - Dainik Bhaskar
मटकुरिया नाले पर भी बनेगा पंपिंग स्टेशन।

सीवरेज एंड ड्रेनेज सिस्टम काे धरातल पर उतारने की कवायद शुरू हाे गई है। घराें के सैप्टिक टैंक व नालाें से निकलने वाले गंदे पानी काे शुद्ध करने के लिए निगम क्षेत्र के पांच स्थानाें पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए जाएंगे। साफ पानी काे दामाेदर नदी समेत अन्य नदियाें तक पहुंचाने के लिए 7 जगह पंपिंग स्टेशन भी बनेंगे।

इसके लिए स्थान का चयन कर लिया गया है। सीवरेज एंड ड्रेनेज सिस्टम को लेकर कंसल्टेंट एजेंसी एनजेएस ने डीपीआर का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। यह ड्राफ्ट एजेंसी ने सर्वे के आधार पर तैयार किया है और इसकी रिपाेर्ट विभाग काे भी साैंप दी गई है। ड्राफ्ट में एसटीपी के लिए जाे स्थान चिह्नित किए हैं, वे सिजुआ, पांडरकनाली, टेटिया, तासरा और नारायणपुर शामिल हैं।

इसी तरह सिजआ, पांडरकनाली, मटकुरिया चेकपाेस्ट, डुमरी, तासरा, नारायणपुर और छाताबाद काे पंपिंग स्टेशन के लिए चयन किया गया है। एसटीपी से गंदा पानी शुद्ध हाेकर पंपिंग स्टेशन में आएगा और यहीं से दामाेदर नदी में भेजा जाएगा।

योजना के लिए 60 एकड़ जमीन की दरकार... 26 एकड़ का मिल गया एनओसी

रोज 192 एमएलडी गंदा पानी साफ होकर नदी में पहुंचेगा

इस याेजना काे धरातल पर उतारने के लिए 60 एकड़ जमीन की जरूरत है। एसटीपी और पंपिंग स्टेशन के साथ-साथ अंडरग्राउंड पाइप बिछाने के लिए भी जमीन चाहिए। निगम की माने ताे 60 में से 26 एकड़ जमीन का एनओसी मिल चुका है। शेष जमीन के एनओसी की प्रक्रिया जारी है।

ड्राफ्ट के अनुसार, प्रति दिन 192 एमएलडी पानी शुद्ध हाेगा और उसे नदी में भेजा जाएगा। हर एसटीपी की क्षमता अलग-अलग है। किसी की क्षमता 75 एमएलडी की है ताे कुछ 60, 21, 18 और 14 एमएलडी की। इसके अलावे निगम क्षेत्र में 200 किलाेमीटर अंडरग्राउंड पाइप बिछाने का भी प्रस्ताव है। इसी पाइप के माध्यम से पानी नदी में जाएगा।

2041 काे ध्यान में रख गंदे पानी को लेकर प्लान बना

सीवरेज एंड ड्रेनेज सिस्टम का प्लान 2041 काे ध्यान में रख कर तैयार किया जा रहा है। 2041 में निगम की आबादी और बढ़ जाएगी। आबादी बढ़ेगी ताे घराें की संख्या में भी इजाफा हाेना स्वाभाविक है। आबादी बढ़ने पर गंदा पानी की मात्रा भी बढ़नी तय है। इसे ध्यान में रख कर इसका डीपीआर भी तैयार की जा रही है। सूत्राें की माने ताे इस याेजना काे कैबिनेट से भी मंजूरी मिल चुकी है। पूरी याेजना 450 कराेड़ की है। जुडकाे काे इसका नाेडल एजेंसी बनाया गया है।

क्या है सीवरेज ड्रेनेज सिस्टम...

अंडरग्राउंड होंगी सभी नालियां, एसटीपी में पहुंच साफ होगा पानी

मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्र में स्थित नालियाें काे अंडरग्राउंड करना है। अभी जितनी भी नालियां है, उनमें अधिकतर खुलाी हुई हैं है। घराें से निकलने वाला गंदा पानी नालियाें से हाेकर आसपास के नदी और तालाबों में जाता है।

इस याेजना के धरातल पर उतर जाने के बाद गंदा पानी नदी-तालाब में नहीं जाएगा। सभी नालियां अंडग्राउंड हाेगी और पाइप से तैयार हाेगी। तीन-चार वार्ड मिलाकर एक एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। शहरी क्षेत्र में एक साथ दाे-दाे पाइप बिछेंगे। एक से नाली का गंदा पानी और दूसरे से सैप्टिक टैंक का पानी सीधे एसटीपी में पहुंचेगा।

सर्वे के आधार पर तैयार हुई आरंभिक रिपोर्ट

सीवरेज ड्रेनेज सिस्टम की फाइनल डीपीआर तैयार नहीं हुई है। जाे रिपाेर्ट दी गई है, वह प्रारंभिक है, जिसे सर्वे के आधार पर तैयार किया गया है। इसका टेंडर विभागीय स्तर पर किया जाएगा।

सत्येंद्र कुमार, नगर आयुक्त

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