एड्स दिवस पर विशेष:10 साल में 2 से 2986 हो गई एड्स मरीजाें की संख्या अस्पताल में एचआईवी वार्ड नहीं

धनबाद2 महीने पहले
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धनबाद में एचआईवी एड्स के मरीजाें की संख्या में लगातार इजाफा हाे रहा है। धनबाद में 10 साल में मरीज की संख्या दाे से बढ़कर वर्तमान में 2986 पहुंच गई है। रिपाेर्ट के अनुसार इस बीमारी से पीड़ित मरीजाें के इलाज के लिए एसएनएमएमसीएच में मई 2010 में एंटी रेट्राेवायरल थेरेपी (एअारटी) सेंटर की शुरुआत हुई। तब पहले माह यहां एचआईवी के मात्र दाे मरीज रजिस्टर्ड हुए। इसके बाद से हर माह मरीजाें की संख्या बढ़ती चली गई।

वर्तमान में एआरटी सेंटर में एचआईवी एड्स के 2986 मरीज रजिस्टर्ड हैं, जबकि इस बीमारी से अब तक पांच साै मरीज अपनी जान गंवा चुके हैं। जिले में एड्स राेगियाें की बढ़ती संख्या चिंताजनक है। इसकी राेकथाम के लिए नेशनल एड्स कंट्राेल ऑर्गेनाइजेशन की अाेर से कई तरह के कार्यक्रम संचालित हैं। एआरटी सेंटर में मरीजाें के लिए नि:शुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

मरीज को अॉपरेशन की जरूरत पड़ी तो सुरक्षा किट तक नहीं

एचआईवी पीड़िताें की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन इनके लिए अलग वार्ड तक का इंतजाम नहीं है। लिहाजा एड्स मरीजाें काे सामान्य वार्ड में मरीजाें के साथ भर्ती कर इलाज किया जाता है। नियमानुसार एचअाईवी पीड़ित की पहचान उजागर करने से मनाही है। वहीं यदि किसी एचआईवी मरीज काे ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है ताे अस्पताल प्रबंधन के पास ऑपरेशन के लिए पर्याप्त सुरक्षा िकट तक नहीं है। एेसे मरीजाें का अाॅपरेशन करने से पहले सुरक्षा किट की खरीदारी करनी पड़ती है।

167 काे ही पेंशन, अायुष्मान योजना से इलाज भी नहीं

एचआईवी मरीजाें काे पूर्व राज्य सरकार की अाेर से प्रत्येक माह 1000 रुपए पेंशन देने की याेजना लागू की गई, लेकिन धनबाद में इस याेजना के तहत फिलहाल मात्र 167 मरीजाें काे ही पेंशन मिल रही है। सरकार फंड नहीं हाेने का हवाला देती है। वहीं आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध बीमारियों में एचआईवी शामिल नहीं है। इसलिए लाभ नहीं मिलता।

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